عیسائیت
واپس

हिज़क़ियेल 14

1इसराईल के कुछ बुज़ुर्ग मुझसे मिलने आए और मेरे सामने बैठ गए।

2तब रब मुझसे हमकलाम हुआ,

3“ऐ आदमज़ाद, इन आदमियों के दिल अपने बुतों से लिपटे रहते हैं। जो चीज़ें उनके लिए ठोकर और गुनाह का बाइस हैं उन्हें उन्होंने अपने मुँह के सामने ही रखा है। तो फिर क्या मुनासिब है कि मैं उन्हें जवाब दूँ जब वह मुझसे दरियाफ़्त करने आते हैं?

4उन्हें बता, ‘रब क़ादिरे-मुतलक़ फ़रमाता है, यह लोग अपने बुतों से लिपटे रहते और वह चीज़ें अपने मुँह के सामने रखते हैं जो ठोकर और गुनाह का बाइस हैं। साथ साथ यह नबी के पास भी जाते हैं ताकि मुझसे मालूमात हासिल करें। जो भी इसराईली ऐसा करे उसे मैं ख़ुद जो रब हूँ जवाब दूँगा, ऐसा जवाब जो उसके मुतअद्दिद बुतों के ऐन मुताबिक़ होगा।

5मैं उनसे ऐसा सुलूक करूँगा ताकि इसराईली क़ौम के दिल को मज़बूती से पकड़ लूँ। क्योंकि अपने बुतों की ख़ातिर सबके सब मुझसे दूर हो गए हैं।’

6चुनाँचे इसराईली क़ौम को बता, ‘रब क़ादिरे-मुतलक़ फ़रमाता है कि तौबा करो! अपने बुतों और तमाम मकरूह रस्मो-रिवाज से मुँह मोड़कर मेरे पास वापस आ जाओ।

7उसके अंजाम पर ध्यान दो जो ऐसा नहीं करेगा, ख़ाह वह इसराईली या इसराईल में रहनेवाला परदेसी हो। अगर वह मुझसे दूर होकर अपने बुतों से लिपट जाए और वह चीज़ें अपने सामने रखे जो ठोकर और गुनाह का बाइस हैं तो जब वह नबी की मारिफ़त मुझसे मालूमात हासिल करने की कोशिश करेगा तो मैं, रब उसे मुनासिब जवाब दूँगा।

8मैं ऐसे शख़्स का सामना करके उससे यों निपट लूँगा कि वह दूसरों के लिए इबरतअंगेज़ मिसाल बन जाएगा। मैं उसे यों मिटा दूँगा कि मेरी क़ौम में उसका नामो-निशान तक नहीं रहेगा। तब तुम जान लोगे कि मैं ही रब हूँ।

9अगर किसी नबी को कुछ सुनाने पर उकसाया गया जो मेरी तरफ़ से नहीं था तो यह इसलिए हुआ कि मैं, रब ने ख़ुद उसे उकसाया। ऐसे नबी के ख़िलाफ़ मैं अपना हाथ उठाकर उसे यों तबाह करूँगा कि मेरी क़ौम में उसका नामो-निशान तक नहीं रहेगा।

10दोनों को उनके क़ुसूर की मुनासिब सज़ा मिलेगी, नबी को भी और उसे भी जो हिदायत पाने के लिए उसके पास आता है।

11तब इसराईली क़ौम न मुझसे दूर होकर आवारा फिरेगी, न अपने आपको इन तमाम गुनाहों से आलूदा करेगी। वह मेरी क़ौम होंगे, और मैं उनका ख़ुदा हूँगा। यह रब क़ादिरे-मुतलक़ का फ़रमान है’।”

12रब मुझसे हमकलाम हुआ,

13“ऐ आदमज़ाद, फ़र्ज़ कर कि कोई मुल्क बेवफ़ा होकर मेरा गुनाह करे, और मैं काल के ज़रीए उसे सज़ा देकर उसमें से इनसानो-हैवान मिटा डालूँ।

14ख़ाह मुल्क में नूह, दानियाल और अय्यूब क्यों न बसते तो भी मुल्क न बचता। यह आदमी अपनी रास्तबाज़ी से सिर्फ़ अपनी ही जानों को बचा सकते। यह रब क़ादिरे-मुतलक़ का फ़रमान है।

15या फ़र्ज़ कर कि मैं मज़कूरा मुल्क में वहशी दरिंदों को भेज दूँ जो इधर-उधर फिरकर सबको फाड़ खाएँ। मुल्क वीरानो-सुनसान हो जाए और जंगली दरिंदों की वजह से कोई उसमें से गुज़रने की जुर्रत न करे।

16मेरी हयात की क़सम, ख़ाह मज़कूरा तीन रास्तबाज़ आदमी मुल्क में क्यों न बसते तो भी अकेले ही बचते। वह अपने बेटे-बेटियों को भी बचा न सकते बल्कि पूरा मुल्क वीरानो-सुनसान होता। यह रब क़ादिरे-मुतलक़ का फ़रमान है।

17या फ़र्ज़ कर कि मैं मज़कूरा मुल्क को जंग से तबाह करूँ, मैं तलवार को हुक्म दूँ कि मुल्क में से गुज़रकर इनसानो-हैवान को नेस्तो-नाबूद कर दे।

18मेरी हयात की क़सम, ख़ाह मज़कूरा तीन रास्तबाज़ आदमी मुल्क में क्यों न बसते वह अकेले ही बचते। वह अपने बेटे-बेटियों को भी बचा न सकते। यह रब क़ादिरे-मुतलक़ का फ़रमान है।

19या फ़र्ज़ कर कि मैं अपना ग़ुस्सा मुल्क पर उतारकर उसमें मोहलक वबा यों फैला दूँ कि इनसानो-हैवान सबके सब मर जाएँ।

20मेरी हयात की क़सम, ख़ाह नूह, दानियाल और अय्यूब मुल्क में क्यों न बसते तो भी वह अपने बेटे-बेटियों को बचा न सकते। वह अपनी रास्तबाज़ी से सिर्फ़ अपनी ही जानों को बचाते। यह रब क़ादिरे-मुतलक़ का फ़रमान है।

21अब यरूशलम के बारे में रब क़ादिरे-मुतलक़ का फ़रमान सुनो! यरूशलम का कितना बुरा हाल होगा जब मैं अपनी चार सख़्त सज़ाएँ उस पर नाज़िल करूँगा। क्योंकि इनसानो-हैवान जंग, काल, वहशी दरिंदों और मोहलक वबा की ज़द में आकर हलाक हो जाएंगे।

22तो भी चंद एक बचेंगे, कुछ बेटे-बेटियाँ जिलावतन होकर बाबल में तुम्हारे पास आएँगे। जब तुम उनका बुरा चाल-चलन और हरकतें देखोगे तो तुम्हें तसल्ली मिलेगी कि हर आफ़त मुनासिब थी जो मैं यरूशलम पर लाया।

23उनका चाल-चलन और हरकतें देखकर तुम्हें तसल्ली मिलेगी, क्योंकि तुम जान लोगे कि जो कुछ भी मैंने यरूशलम के साथ किया वह बिलावजह नहीं था। यह रब क़ादिरे-मुतलक़ का फ़रमान है।”

ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस

WEBREATH · 11:11

«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25

Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.

WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath