عیسائیت
واپس

ख़ुरूज 8

1फिर रब ने मूसा से कहा, “फ़िरौन के पास जाकर उसे बता देना कि रब फ़रमाता है, ‘मेरी क़ौम को मेरी इबादत करने के लिए जाने दे,

2वरना मैं पूरे मिसर को मेंढकों से सज़ा दूँगा।

3दरियाए-नील मेंढकों से इतना भर जाएगा कि वह दरिया से निकलकर तेरे महल, तेरे सोने के कमरे और तेरे बिस्तर में जा घुसेंगे। वह तेरे ओहदेदारों और तेरी रिआया के घरों में आएँगे बल्कि तेरे तनूरों और आटा गूँधने के बरतनों में भी फुदकते फिरेंगे।

4मेंढक तुझ पर, तेरी क़ौम पर और तेरे ओहदेदारों पर चढ़ जाएंगे’।”

5रब ने मूसा से कहा, “हारून को बता देना कि वह अपनी लाठी को हाथ में लेकर उसे दरियाओं, नहरों और जोहड़ों के ऊपर उठाए ताकि मेंढक बाहर निकलकर मिसर के मुल्क में फैल जाएँ।”

6हारून ने मुल्के-मिसर के पानी के ऊपर अपनी लाठी उठाई तो मेंढकों के ग़ोल पानी से निकलकर पूरे मुल्क पर छा गए।

7लेकिन जादूगरों ने भी अपने जादू से ऐसा ही किया। वह भी दरिया से मेंढक निकाल लाए।

8फ़िरौन ने मूसा और हारून को बुलाकर कहा, “रब से दुआ करो कि वह मुझसे और मेरी क़ौम से मेंढकों को दूर करे। फिर मैं तुम्हारी क़ौम को जाने दूँगा ताकि वह रब को क़ुरबानियाँ पेश करें।”

9मूसा ने जवाब दिया, “वह वक़्त मुक़र्रर करें जब मैं आपके ओहदेदारों और आपकी क़ौम के लिए दुआ करूँ। फिर जो मेंढक आपके पास और आपके घरों में हैं उसी वक़्त ख़त्म हो जाएंगे। मेंढक सिर्फ़ दरिया में पाए जाएंगे।”

10फ़िरौन ने कहा, “ठीक है, कल उन्हें ख़त्म करो।” मूसा ने कहा, “जैसा आप कहते हैं वैसा ही होगा। इस तरह आपको मालूम होगा कि हमारे ख़ुदा की मानिंद कोई नहीं है।

11मेंढक आप, आपके घरों, आपके ओहदेदारों और आपकी क़ौम को छोड़कर सिर्फ़ दरिया में रह जाएंगे।”

12मूसा और हारून फ़िरौन के पास से चले गए, और मूसा ने रब से मिन्नत की कि वह मेंढकों के वह ग़ोल दूर करे जो उसने फ़िरौन के ख़िलाफ़ भेजे थे।

13रब ने उस की दुआ सुनी। घरों, सहनों और खेतों में मेंढक मर गए।

14लोगों ने उन्हें जमा करके उनके ढेर लगा दिए। उनकी बदबू पूरे मुल्क में फैल गई।

15लेकिन जब फ़िरौन ने देखा कि मसला हल हो गया है तो वह फिर अकड़ गया और उनकी न सुनी। यों रब की बात दुरुस्त निकली।

16फिर रब ने मूसा से कहा, “हारून से कहना कि वह अपनी लाठी से ज़मीन की गर्द को मारे। जब वह ऐसा करेगा तो पूरे मिसर की गर्द जुओं में बदल जाएगी।”

17उन्होंने ऐसा ही किया। हारून ने अपनी लाठी से ज़मीन की गर्द को मारा तो पूरे मुल्क की गर्द जुओं में बदल गई। उनके ग़ोल जानवरों और आदमियों पर छा गए।

18जादूगरों ने भी अपने जादू से ऐसा करने की कोशिश की, लेकिन वह गर्द से जुएँ न बना सके। जुएँ आदमियों और जानवरों पर छा गईं।

19जादूगरों ने फ़िरौन से कहा, “अल्लाह की क़ुदरत ने यह किया है।” लेकिन फ़िरौन ने उनकी न सुनी। यों रब की बात दुरुस्त निकली।

20फिर रब ने मूसा से कहा, “जब फ़िरौन सुबह-सवेरे दरिया पर जाए तो तू उसके रास्ते में खड़ा हो जाना। उसे कहना कि रब फ़रमाता है, ‘मेरी क़ौम को जाने दे ताकि वह मेरी इबादत कर सकें।

21वरना मैं तेरे और तेरे ओहदेदारों के पास, तेरी क़ौम के पास और तेरे घरों में काटनेवाली मक्खियाँ भेज दूँगा। मिसरियों के घर मक्खियों से भर जाएंगे बल्कि जिस ज़मीन पर वह खड़े हैं वह भी मक्खियों से ढाँकी जाएगी।

22लेकिन उस वक़्त मैं अपनी क़ौम के साथ जो जुशन में रहती है फ़रक़ सुलूक करूँगा। वहाँ एक भी काटनेवाली मक्खी नहीं होगी। इस तरह तुझे पता लगेगा कि इस मुल्क में मैं ही रब हूँ।

23मैं अपनी क़ौम और तेरी क़ौम में इम्तियाज़ करूँगा। कल ही मेरी क़ुदरत का इज़हार होगा’।”

24रब ने ऐसा ही किया। काटनेवाली मक्खियों के ग़ोल फ़िरौन के महल, उसके ओहदेदारों के घरों और पूरे मिसर में फैल गए। मुल्क का सत्यानास हो गया।

25फिर फ़िरौन ने मूसा और हारून को बुलाकर कहा, “चलो, इसी मुल्क में अपने ख़ुदा को क़ुरबानियाँ पेश करो।”

26लेकिन मूसा ने कहा, “यह मुनासिब नहीं है। जो क़ुरबानियाँ हम रब अपने ख़ुदा को पेश करेंगे वह मिसरियों की नज़र में घिनौनी हैं। अगर हम यहाँ ऐसा करें तो क्या वह हमें संगसार नहीं करेंगे?

27इसलिए लाज़िम है कि हम तीन दिन का सफ़र करके रेगिस्तान में ही रब अपने ख़ुदा को क़ुरबानियाँ पेश करें जिस तरह उसने हमें हुक्म भी दिया है।”

28फ़िरौन ने जवाब दिया, “ठीक है, मैं तुम्हें जाने दूँगा ताकि तुम रेगिस्तान में रब अपने ख़ुदा को क़ुरबानियाँ पेश करो। लेकिन तुम्हें ज़्यादा दूर नहीं जाना है। और मेरे लिए भी दुआ करना।”

29मूसा ने कहा, “ठीक, मैं जाते ही रब से दुआ करूँगा। कल ही मक्खियाँ फ़िरौन, उसके ओहदेदारों और उस की क़ौम से दूर हो जाएँगी। लेकिन हमें दुबारा फ़रेब न देना बल्कि हमें जाने देना ताकि हम रब को क़ुरबानियाँ पेश कर सकें।”

30फिर मूसा फ़िरौन के पास से चला गया और रब से दुआ की।

31रब ने मूसा की दुआ सुनी। काटनेवाली मक्खियाँ फ़िरौन, उसके ओहदेदारों और उस की क़ौम से दूर हो गईं। एक भी मक्खी न रही।

32लेकिन फ़िरौन फिर अकड़ गया। उसने इसराईलियों को जाने न दिया।

ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस

WEBREATH · 11:11

«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25

Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.

WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath