عیسائیت
واپس

ख़ुरूज 34

1रब ने मूसा से कहा, “अपने लिए पत्थर की दो तख़्तियाँ तराश ले जो पहली दो की मानिंद हों। फिर मैं उन पर वह अलफ़ाज़ लिखूँगा जो पहली तख़्तियों पर लिखे थे जिन्हें तूने पटख़ दिया था।

2सुबह तक तैयार होकर सीना पहाड़ पर चढ़ना। चोटी पर मेरे सामने खड़ा हो जा।

3तेरे साथ कोई भी न आए बल्कि पूरे पहाड़ पर कोई और शख़्स नज़र न आए, यहाँ तक कि भेड़-बकरियाँ और गाय-बैल भी पहाड़ के दामन में न चरें।”

4चुनाँचे मूसा ने दो तख़्तियाँ तराश लीं जो पहली की मानिंद थीं। फिर वह सुबह-सवेरे उठकर सीना पहाड़ पर चढ़ गया जिस तरह रब ने उसे हुक्म दिया था। उसके हाथों में पत्थर की दोनों तख़्तियाँ थीं।

5जब वह चोटी पर पहुँचा तो रब बादल में उतर आया और उसके पास खड़े होकर अपने नाम रब का एलान किया।

6मूसा के सामने से गुज़रते हुए उसने पुकारा, “रब, रब, रहीम और मेहरबान ख़ुदा। तहम्मुल, शफ़क़त और वफ़ा से भरपूर।

7वह हज़ारों पर अपनी शफ़क़त क़ायम रखता और लोगों का क़ुसूर, नाफ़रमानी और गुनाह मुआफ़ करता है। लेकिन वह हर एक को उस की मुनासिब सज़ा भी देता है। जब वालिदैन गुनाह करें तो उनकी औलाद को भी तीसरी और चौथी पुश्त तक सज़ा के नतायज भुगतने पड़ेंगे।”

8मूसा ने जल्दी से झुककर सिजदा किया।

9उसने कहा, “ऐ रब, अगर मुझ पर तेरा करम हो तो हमारे साथ चल। बेशक यह क़ौम हटधर्म है, तो भी हमारा क़ुसूर और गुनाह मुआफ़ कर और बख़्श दे कि हम दुबारा तेरे ही बन जाएँ।”

10तब रब ने कहा, “मैं तुम्हारे साथ अहद बाँधूँगा। तेरी क़ौम के सामने ही मैं ऐसे मोजिज़े करूँगा जो अब तक दुनिया-भर की किसी भी क़ौम में नहीं किए गए। पूरी क़ौम जिसके दरमियान तू रहता है रब का काम देखेगी और उससे डर जाएगी जो मैं तेरे साथ करूँगा।

11जो अहकाम मैं आज देता हूँ उन पर अमल करता रह। मैं अमोरी, कनानी, हित्ती, फ़रिज़्ज़ी, हिव्वी और यबूसी अक़वाम को तेरे आगे आगे मुल्क से निकाल दूँगा।

12ख़बरदार, जो उस मुल्क में रहते हैं जहाँ तू जा रहा है उनसे अहद न बाँधना। वरना वह तेरे दरमियान रहते हुए तुझे गुनाहों में फँसाते रहेंगे।

13उनकी क़ुरबानगाहें ढा देना, उनके बुतों के सतून टुकड़े टुकड़े कर देना और उनकी देवी यसीरत के खंबे काट डालना।

14किसी और माबूद की परस्तिश न करना, क्योंकि रब का नाम ग़यूर है, अल्लाह ग़ैरतमंद है।

15ख़बरदार, उस मुल्क के बाशिंदों से अहद न करना, क्योंकि तेरे दरमियान रहते हुए भी वह अपने माबूदों की पैरवी करके ज़िना करेंगे और उन्हें क़ुरबानियाँ चढ़ाएँगे। आख़िरकार वह तुझे भी अपनी क़ुरबानियों में शिरकत की दावत देंगे।

16ख़तरा है कि तू उनकी बेटियों का अपने बेटों के साथ रिश्ता बाँधे। फिर जब यह अपने माबूदों की पैरवी करके ज़िना करेंगी तो उनके सबब से तेरे बेटे भी उनकी पैरवी करने लगेंगे।

17अपने लिए देवता न ढालना।

18बेख़मीरी रोटी की ईद मनाना। अबीब के महीने में सात दिन तक तेरी रोटी में ख़मीर न हो जिस तरह मैंने हुक्म दिया है। क्योंकि इस महीने में तू मिसर से निकला।

19हर पहलौठा मेरा है। तेरे माल मवेशियों का हर पहलौठा मेरा है, चाहे बछड़ा हो या लेला।

20लेकिन पहलौठे गधे के एवज़ भेड़ देना। अगर यह मुमकिन न हो तो उस की गरदन तोड़ डालना। अपने पहलौठे बेटों के लिए भी एवज़ी देना। कोई मेरे पास ख़ाली हाथ न आए।

21छः दिन काम-काज करना, लेकिन सातवें दिन आराम करना। ख़ाह हल चलाना हो या फ़सल काटनी हो तो भी सातवें दिन आराम करना।

22गंदुम की फ़सल की कटाई की ईद उस वक़्त मनाना जब तू गेहूँ की पहली फ़सल काटेगा। अंगूर और फल जमा करने की ईद इसराईली साल के इख़्तिताम पर मनानी है।

23लाज़िम है कि तेरे तमाम मर्द साल में तीन मरतबा रब क़ादिरे-मुतलक़ के सामने जो इसराईल का ख़ुदा है हाज़िर हों।

24मैं तेरे आगे आगे क़ौमों को मुल्क से निकाल दूँगा और तेरी सरहद्दें बढ़ाता जाऊँगा। फिर जब तू साल में तीन मरतबा रब अपने ख़ुदा के हुज़ूर आएगा तो कोई भी तेरे मुल्क का लालच नहीं करेगा।

25जब तू किसी जानवर को ज़बह करके क़ुरबानी के तौर पर पेश करता है तो उसके ख़ून के साथ ऐसी रोटी पेश न करना जिसमें ख़मीर हो। ईदे-फ़सह की क़ुरबानी से अगली सुबह तक कुछ बाक़ी न रहे।

26अपनी ज़मीन की पहली पैदावार में से बेहतरीन हिस्सा रब अपने ख़ुदा के घर में ले आना। बकरी या भेड़ के बच्चे को उस की माँ के दूध में न पकाना।”

27रब ने मूसा से कहा, “यह तमाम बातें लिख ले, क्योंकि यह उस अहद की बुनियाद हैं जो मैंने तेरे और इसराईल के साथ बाँधा है।”

28मूसा चालीस दिन और चालीस रात वहीं रब के हुज़ूर रहा। इस दौरान न उसने कुछ खाया न पिया। उसने पत्थर की तख़्तियों पर अहद के दस अहकाम लिखे।

29इसके बाद मूसा शरीअत की दोनों तख़्तियों को हाथ में लिए हुए सीना पहाड़ से उतरा। उसके चेहरे की जिल्द चमक रही थी, क्योंकि उसने रब से बात की थी। लेकिन उसे ख़ुद इसका इल्म नहीं था।

30जब हारून और तमाम इसराईलियों ने देखा कि मूसा का चेहरा चमक रहा है तो वह उसके पास आने से डर गए।

31लेकिन उसने उन्हें बुलाया तो हारून और जमात के तमाम सरदार उसके पास आए, और उसने उनसे बात की।

32बाद में बाक़ी इसराईली भी आए, और मूसा ने उन्हें तमाम अहकाम सुनाए जो रब ने उसे कोहे-सीना पर दिए थे।

33यह सब कुछ कहने के बाद मूसा ने अपने चेहरे पर निक़ाब डाल लिया।

34जब भी वह रब से बात करने के लिए मुलाक़ात के ख़ैमे में जाता तो निक़ाब को ख़ैमे से निकलते वक़्त तक उतार लेता। और जब वह निकलकर इसराईलियों को रब से मिले हुए अहकाम सुनाता

35तो वह देखते कि उसके चेहरे की जिल्द चमक रही है। इसके बाद मूसा दुबारा निक़ाब को अपने चेहरे पर डाल लेता, और वह उस वक़्त तक चेहरे पर रहता जब तक मूसा रब से बात करने के लिए मुलाक़ात के ख़ैमे में न जाता था।

ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस

WEBREATH · 11:11

«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25

Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.

WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath