عیسائیت
واپس

ख़ुरूज 2

1उन दिनों में लावी के एक आदमी ने अपने ही क़बीले की एक औरत से शादी की।

2औरत हामिला हुई और बच्चा पैदा हुआ। माँ ने देखा कि लड़का ख़ूबसूरत है, इसलिए उसने उसे तीन माह तक छुपाए रखा।

3जब वह उसे और ज़्यादा न छुपा सकी तो उसने आबी नरसल से टोकरी बनाकर उस पर तारकोल चढ़ाया। फिर उसने बच्चे को टोकरी में रखकर टोकरी को दरियाए-नील के किनारे पर उगे हुए सरकंडों में रख दिया।

4बच्चे की बहन कुछ फ़ासले पर खड़ी देखती रही कि उसका क्या बनेगा।

5उस वक़्त फ़िरौन की बेटी नहाने के लिए दरिया पर आई। उस की नौकरानियाँ दरिया के किनारे टहलने लगीं। तब उसने सरकंडों में टोकरी देखी और अपनी लौंडी को उसे लाने भेजा।

6उसे खोला तो छोटा लड़का दिखाई दिया जो रो रहा था। फ़िरौन की बेटी को उस पर तरस आया। उसने कहा, “यह कोई इबरानी बच्चा है।”

7अब बच्चे की बहन फ़िरौन की बेटी के पास गई और पूछा, “क्या मैं बच्चे को दूध पिलाने के लिए कोई इबरानी औरत ढूँड लाऊँ?”

8फ़िरौन की बेटी ने कहा, “हाँ, जाओ।” लड़की चली गई और बच्चे की सगी माँ को लेकर वापस आई।

9फ़िरौन की बेटी ने माँ से कहा, “बच्चे को ले जाओ और उसे मेरे लिए दूध पिलाया करो। मैं तुम्हें इसका मुआवज़ा दूँगी।” चुनाँचे बच्चे की माँ ने उसे दूध पिलाने के लिए ले लिया।

10जब बच्चा बड़ा हुआ तो उस की माँ उसे फ़िरौन की बेटी के पास ले गई, और वह उसका बेटा बन गया। फ़िरौन की बेटी ने उसका नाम मूसा यानी ‘निकाला गया’ रखकर कहा, “मैं उसे पानी से निकाल लाई हूँ।”

11जब मूसा जवान हुआ तो एक दिन वह घर से निकलकर अपने लोगों के पास गया जो जबरी काम में मसरूफ़ थे। मूसा ने देखा कि एक मिसरी मेरे एक इबरानी भाई को मार रहा है।

12मूसा ने चारों तरफ़ नज़र दौड़ाई। जब मालूम हुआ कि कोई नहीं देख रहा तो उसने मिसरी को जान से मार दिया और उसे रेत में छुपा दिया।

13अगले दिन भी मूसा घर से निकला। इस दफ़ा दो इबरानी मर्द आपस में लड़ रहे थे। जो ग़लती पर था उससे मूसा ने पूछा, “तुम अपने भाई को क्यों मार रहे हो?”

14आदमी ने जवाब दिया, “किसने आपको हम पर हुक्मरान और क़ाज़ी मुक़र्रर किया है? क्या आप मुझे भी क़त्ल करना चाहते हैं जिस तरह मिसरी को मार डाला था?” तब मूसा डर गया। उसने सोचा, “हाय, मेरा भेद खुल गया है!”

15बादशाह को भी पता लगा तो उसने मूसा को मरवाने की कोशिश की। लेकिन मूसा मिदियान के मुल्क को भाग गया। वहाँ वह एक कुएँ के पास बैठ गया।

16मिदियान में एक इमाम था जिसकी सात बेटियाँ थीं। यह लड़कियाँ अपनी भेड़-बकरियों को पानी पिलाने के लिए कुएँ पर आईं और पानी निकालकर हौज़ भरने लगीं।

17लेकिन कुछ चरवाहों ने आकर उन्हें भगा दिया। यह देखकर मूसा उठा और लड़कियों को चरवाहों से बचाकर उनके रेवड़ को पानी पिलाया।

18जब लड़कियाँ अपने बाप रऊएल के पास वापस आईं तो बाप ने पूछा, “आज तुम इतनी जल्दी से क्यों वापस आ गई हो?”

19लड़कियों ने जवाब दिया, “एक मिसरी आदमी ने हमें चरवाहों से बचाया। न सिर्फ़ यह बल्कि उसने हमारे लिए पानी भी निकालकर रेवड़ को पिला दिया।”

20रऊएल ने कहा, “वह आदमी कहाँ है? तुम उसे क्यों छोड़कर आई हो? उसे बुलाओ ताकि वह हमारे साथ खाना खाए।”

21मूसा रऊएल के घर में ठहरने के लिए राज़ी हो गया। बाद में उस की शादी रऊएल की बेटी सफ़्फ़ूरा से हुई।

22सफ़्फ़ूरा के बेटा पैदा हुआ तो मूसा ने कहा, “इसका नाम जैरसोम यानी ‘अजनबी मुल्क में परदेसी’ हो, क्योंकि मैं अजनबी मुल्क में परदेसी हूँ।”

23काफ़ी अरसा गुज़र गया। इतने में मिसर का बादशाह इंतक़ाल कर गया। इसराईली अपनी ग़ुलामी तले कराहते और मदद के लिए पुकारते रहे, और उनकी चीख़ें अल्लाह तक पहुँच गईं।

24अल्लाह ने उनकी आहें सुनीं और उस अहद को याद किया जो उसने इब्राहीम, इसहाक़ और याक़ूब से बाँधा था।

25अल्लाह इसराईलियों की हालत देखकर उनका ख़याल करने लगा।

ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस

WEBREATH · 11:11

«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25

Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.

WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath