عیسائیت
واپس

ख़ुरूज 23

1ग़लत अफ़वाहें न फैलाना। किसी शरीर आदमी का साथ देकर झूटी गवाही देना मना है।

2अगर अकसरियत ग़लत काम कर रही हो तो उसके पीछे न हो लेना। अदालत में गवाही देते वक़्त अकसरियत के साथ मिलकर ऐसी बात न करना जिससे ग़लत फ़ैसला किया जाए।

3लेकिन अदालत में किसी ग़रीब की तरफ़दारी भी न करना।

4अगर तुझे तेरे दुश्मन का बैल या गधा आवारा फिरता हुआ नज़र आए तो उसे हर सूरत में वापस कर देना।

5अगर तुझसे नफ़रत करनेवाले का गधा बोझ तले गिर गया हो और तुझे पता लगे तो उसे न छोड़ना बल्कि ज़रूर उस की मदद करना।

6अदालत में ग़रीब के हुक़ूक़ न मारना।

7ऐसे मामले से दूर रहना जिसमें लोग झूट बोलते हैं। जो बेगुनाह और हक़ पर है उसे सज़ाए-मौत न देना, क्योंकि मैं क़ुसूरवार को हक़-बजानिब नहीं ठहराऊँगा।

8रिश्वत न लेना, क्योंकि रिश्वत देखनेवाले को अंधा कर देती है और उस की बात बनने नहीं देती जो हक़ पर है।

9जो परदेसी तेरे मुल्क में मेहमान है उस पर दबाव न डालना। तुम ऐसे लोगों की हालत से ख़ूब वाक़िफ़ हो, क्योंकि तुम ख़ुद मिसर में परदेसी रहे हो।

10छः साल तक अपनी ज़मीन में बीज बोकर उस की पैदावार जमा करना।

11लेकिन सातवें साल ज़मीन को इस्तेमाल न करना बल्कि उसे पड़े रहने देना। जो कुछ भी उगे वह क़ौम के ग़रीब लोग खाएँ। जो उनसे बच जाए उसे जंगली जानवर खाएँ। अपने अंगूर और ज़ैतून के बाग़ों के साथ भी ऐसा ही करना है।

12छः दिन अपना काम-काज करना, लेकिन सातवें दिन आराम करना। फिर तेरा बैल और तेरा गधा भी आराम कर सकेंगे, तेरी लौंडी का बेटा और तेरे साथ रहनेवाला परदेसी भी ताज़ादम हो जाएंगे।

13जो भी हिदायत मैंने दी है उस पर अमल कर। दीगर माबूदों की परस्तिश न करना। मैं तेरे मुँह से उनके नामों तक का ज़िक्र न सुनूँ।

14साल में तीन दफ़ा मेरी ताज़ीम में ईद मनाना।

15पहले, बेख़मीरी रोटी की ईद मनाना। अबीब के महीने में सात दिन तक तेरी रोटी में ख़मीर न हो जिस तरह मैंने हुक्म दिया है, क्योंकि इस महीने में तू मिसर से निकला। इन दिनों में कोई मेरे हुज़ूर ख़ाली हाथ न आए।

16दूसरे, फ़सलकटाई की ईद उस वक़्त मनाना जब तू अपने खेत में बोई हुई पहली फ़सल काटेगा। तीसरे, जमा करने की ईद फ़सल की कटाई के इख़्तिताम पर मनाना है जब तूने अंगूर और बाक़ी बाग़ों के फल जमा किए होंगे।

17यों तेरे तमाम मर्द तीन मरतबा रब क़ादिरे-मुतलक़ के हुज़ूर हाज़िर हुआ करें।

18जब तू किसी जानवर को ज़बह करके क़ुरबानी के तौर पर पेश करे तो उसके ख़ून के साथ ऐसी रोटी पेश न करना जिसमें ख़मीर हो। और जो जानवर तू मेरी ईदों पर चढ़ाए उनकी चरबी अगली सुबह तक बाक़ी न रहे।

19अपनी ज़मीन की पहली पैदावार का बेहतरीन हिस्सा रब अपने ख़ुदा के घर में लाना। भेड़ या बकरी के बच्चे को उस की माँ के दूध में न पकाना।

20मैं तेरे आगे आगे फ़रिश्ता भेजता हूँ जो रास्ते में तेरी हिफ़ाज़त करेगा और तुझे उस जगह तक ले जाएगा जो मैंने तेरे लिए तैयार की है।

21उस की मौजूदगी में एहतियात बरतना। उस की सुनना, और उस की ख़िलाफ़वरज़ी न करना। अगर तू सरकश हो जाए तो वह तुझे मुआफ़ नहीं करेगा, क्योंकि मेरा नाम उसमें हाज़िर होगा।

22लेकिन अगर तू उस की सुने और सब कुछ करे जो मैं तुझे बताता हूँ तो मैं तेरे दुश्मनों का दुश्मन और तेरे मुख़ालिफ़ों का मुख़ालिफ़ हूँगा।

23क्योंकि मेरा फ़रिश्ता तेरे आगे आगे चलेगा और तुझे मुल्के-कनान तक पहुँचा देगा जहाँ अमोरी, हित्ती, फ़रिज़्ज़ी, कनानी, हिव्वी और यबूसी आबाद हैं। तब मैं उन्हें रूए-ज़मीन पर से मिटा दूँगा।

24उनके माबूदों को सिजदा न करना, न उनकी ख़िदमत करना। उनके रस्मो-रिवाज भी न अपनाना बल्कि उनके बुतों को तबाह कर देना। जिन सतूनों के सामने वह इबादत करते हैं उनको भी टुकड़े टुकड़े कर डालना।

25रब अपने ख़ुदा की ख़िदमत करना। फिर मैं तेरी ख़ुराक और पानी को बरकत देकर तमाम बीमारियाँ तुझसे दूर करूँगा।

26फिर तेरे मुल्क में न किसी का बच्चा ज़ाया होगा, न कोई बाँझ होगी। साथ ही मैं तुझे तवील ज़िंदगी अता करूँगा।

27मैं तेरे आगे आगे दहशत फैलाऊँगा। जहाँ भी तू जाएगा वहाँ मैं तमाम क़ौमों में अबतरी पैदा करूँगा। मेरे सबब से तेरे सारे दुश्मन पलटकर भाग जाएंगे।

28मैं तेरे आगे ज़ंबूर भेज दूँगा जो हिव्वी, कनानी और हित्ती को मुल्क छोड़ने पर मजबूर करेंगे।

29लेकिन जब तू वहाँ पहुँचेगा तो मैं उन्हें एक ही साल में मुल्क से नहीं निकालूँगा। वरना पूरा मुल्क वीरान हो जाएगा और जंगली जानवर फैलकर तेरे लिए नुक़सान का बाइस बन जाएंगे।

30इसलिए मैं तेरे पहुँचने पर मुल्क के बाशिंदों को थोड़ा थोड़ा करके निकालता जाऊँगा। इतने में तेरी तादाद बढ़ेगी और तू रफ़्ता रफ़्ता मुल्क पर क़ब्ज़ा कर सकेगा।

31मैं तेरी सरहद्दें मुक़र्रर करूँगा। बहरे-क़ुलज़ुम एक हद होगी और फ़िलिस्तियों का समुंदर दूसरी, जुनूब का रेगिस्तान एक होगी और दरियाए-फ़ुरात दूसरी। मैं मुल्क के बाशिंदों को तेरे क़ब्ज़े में कर दूँगा, और तू उन्हें अपने आगे आगे मुल्क से दूर करता जाएगा।

32लाज़िम है कि तू उनके साथ या उनके माबूदों के साथ अहद न बाँधे।

33उनका तेरे मुल्क में रहना मना है, वरना तू उनके सबब से मेरा गुनाह करेगा। अगर तू उनके माबूदों की इबादत करेगा तो यह तेरे लिए फंदा बन जाएगा’।”

ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस

WEBREATH · 11:11

«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25

Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.

WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath