عیسائیت
واپس

ख़ुरूज 17

1फिर इसराईल की पूरी जमात सीन के रेगिस्तान से निकली। रब जिस तरह हुक्म देता रहा वह एक जगह से दूसरी जगह सफ़र करते रहे। रफ़ीदीम में उन्होंने ख़ैमे लगाए। वहाँ पीने के लिए पानी न मिला।

2इसलिए वह मूसा के साथ यह कहकर झगड़ने लगे, “हमें पीने के लिए पानी दो।” मूसा ने जवाब दिया, “तुम मुझसे क्यों झगड़ रहे हो? रब को क्यों आज़मा रहे हो?”

3लेकिन लोग बहुत प्यासे थे। वह मूसा के ख़िलाफ़ बुड़बुड़ाने से बाज़ न आए बल्कि कहा, “आप हमें मिसर से क्यों लाए हैं? क्या इसलिए कि हम अपने बच्चों और रेवड़ों समेत प्यासे मर जाएँ?”

4तब मूसा ने रब के हुज़ूर फ़रियाद की, “मैं इन लोगों के साथ क्या करूँ? हालात ज़रा भी और बिगड़ जाएँ तो वह मुझे संगसार कर देंगे।”

5रब ने मूसा से कहा, “कुछ बुज़ुर्ग साथ लेकर लोगों के आगे आगे चल। वह लाठी भी साथ ले जा जिससे तूने दरियाए-नील को मारा था।

6मैं होरिब यानी सीना पहाड़ की एक चट्टान पर तेरे सामने खड़ा हूँगा। लाठी से चट्टान को मारना तो उससे पानी निकलेगा और लोग पी सकेंगे।” मूसा ने इसराईल के बुज़ुर्गों के सामने ऐसा ही किया।

7उसने उस जगह का नाम मस्सा और मरीबा यानी ‘आज़माना और झगड़ना’ रखा, क्योंकि वहाँ इसराईली बुड़बुड़ाए और यह पूछकर रब को आज़माया कि क्या रब हमारे दरमियान है कि नहीं?

8रफ़ीदीम वह जगह भी थी जहाँ अमालीक़ी इसराईलियों से लड़ने आए।

9मूसा ने यशुअ से कहा, “लड़ने के क़ाबिल आदमियों को चुन लो और निकलकर अमालीक़ियों का मुक़ाबला करो। कल मैं अल्लाह की लाठी पकड़े हुए पहाड़ की चोटी पर खड़ा हो जाऊँगा।”

10यशुअ मूसा की हिदायत के मुताबिक़ अमालीक़ियों से लड़ने गया जबकि मूसा, हारून और हूर पहाड़ की चोटी पर चढ़ गए।

11और यों हुआ कि जब मूसा के हाथ उठाए हुए थे तो इसराईली जीतते रहे, और जब वह नीचे थे तो अमालीक़ी जीतते रहे।

12कुछ देर के बाद मूसा के बाज़ू थक गए। इसलिए हारून और हूर एक चट्टान ले आए ताकि वह उस पर बैठ जाए। फिर उन्होंने उसके दाईं और बाईं तरफ़ खड़े होकर उसके बाज़ुओं को ऊपर उठाए रखा। सूरज के ग़ुरूब होने तक उन्होंने यों मूसा की मदद की।

13इस तरह यशुअ ने अमालीक़ियों से लड़ते लड़ते उन्हें शिकस्त दी।

14तब रब ने मूसा से कहा, “यह वाक़िया यादगारी के लिए किताब में लिख ले। लाज़िम है कि यह सब कुछ यशुअ की याद में रहे, क्योंकि मैं दुनिया से अमालीक़ियों का नामो-निशान मिटा दूँगा।”

15उस वक़्त मूसा ने क़ुरबानगाह बनाकर उसका नाम ‘रब मेरा झंडा है’ रखा।

16उसने कहा, “रब के तख़्त के ख़िलाफ़ हाथ उठाया गया है, इसलिए रब की अमालीक़ियों से हमेशा तक जंग रहेगी।”

ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस

WEBREATH · 11:11

«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25

Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.

WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath