عیسائیت
واپس

आस्तर 6

1उस रात बादशाह को नींद न आई, इसलिए उसने हुक्म दिया कि वह किताब लाई जाए जिसमें रोज़ाना हुकूमत के अहम वाक़ियात लिखे जाते हैं। उसमें से पढ़ा गया

2तो इसका भी ज़िक्र हुआ कि मर्दकी ने किस तरह बादशाह को दोनों ख़्वाजासराओं बिगताना और तरश के हाथ से बचाया था, कि जब शाही कमरों के इन पहरेदारों ने अख़स्वेरुस को क़त्ल करने की साज़िश की तो मर्दकी ने बादशाह को इत्तला दी थी।

3जब यह वाक़िया पढ़ा गया तो बादशाह ने पूछा, “इसके एवज़ मर्दकी को क्या एज़ाज़ दिया गया?” मुलाज़िमों ने जवाब दिया, “कुछ भी नहीं दिया गया।”

4उसी लमहे हामान महल के बैरूनी सहन में आ पहुँचा था ताकि बादशाह से मर्दकी को उस सूली से लटकाने की इजाज़त माँगे जो उसने उसके लिए बनवाई थी। बादशाह ने सवाल किया, “बाहर सहन में कौन है?”

5मुलाज़िमों ने जवाब दिया, “हामान है।” बादशाह ने हुक्म दिया, “उसे अंदर आने दो।”

6हामान दाख़िल हुआ तो बादशाह ने उससे पूछा, “उस आदमी के लिए क्या किया जाए जिसकी बादशाह ख़ास इज़्ज़त करना चाहे?” हामान ने सोचा, “वह मेरी ही बात कर रहा है! क्योंकि मेरी निसबत कौन है जिसकी बादशाह ज़्यादा इज़्ज़त करना चाहता है?”

7चुनाँचे उसने जवाब दिया, “जिस आदमी की बादशाह ख़ास इज़्ज़त करना चाहें

8उसके लिए शाही लिबास चुना जाए जो बादशाह ख़ुद पहन चुके हों। एक घोड़ा भी लाया जाए जिसका सर शाही सजावट से सजा हुआ हो और जिस पर बादशाह ख़ुद सवार हो चुके हों।

9यह लिबास और घोड़ा बादशाह के आलातरीन अफ़सरों में से एक के सुपुर्द किया जाए। वही उस शख़्स को जिसकी बादशाह ख़ास इज़्ज़त करना चाहते हैं कपड़े पहनाए और उसे घोड़े पर बिठाकर शहर के चौक में से गुज़ारे। साथ साथ वह उसके आगे आगे चलकर एलान करे, ‘यही उसके साथ किया जाता है जिसकी इज़्ज़त बादशाह करना चाहते हैं’।”

10अख़स्वेरुस ने हामान से कहा, “फिर जल्दी करें, मर्दकी यहूदी शाही सहन के दरवाज़े के पास बैठा है। शाही लिबास और घोड़ा मँगवाकर उसके साथ ऐसा ही सुलूक करें। जो भी करने का मशवरा आपने दिया वही कुछ करें, और ध्यान दें कि इसमें किसी भी चीज़ की कमी न हो!”

11हामान को ऐसा ही करना पड़ा। शाही लिबास को चुनकर उसने उसे मर्दकी को पहना दिया। फिर उसे बादशाह के अपने घोड़े पर बिठाकर उसने उसे शहर के चौक में से गुज़ारा। साथ साथ वह उसके आगे आगे चलकर एलान करता रहा, “यही उस शख़्स के साथ किया जाता है जिसकी इज़्ज़त बादशाह करना चाहता है।”

12फिर मर्दकी शाही सहन के दरवाज़े के पास वापस आया। लेकिन हामान उदास होकर जल्दी से अपने घर चला गया। शर्म के मारे उसने मुँह पर कपड़ा डाल लिया था।

13उसने अपनी बीवी ज़रिश और अपने दोस्तों को सब कुछ सुनाया जो उसके साथ हुआ था। तब उसके मुशीरों और बीवी ने उससे कहा, “आपका बेड़ा ग़रक़ हो गया है, क्योंकि मर्दकी यहूदी है और आप उसके सामने शिकस्त खाने लगे हैं। आप उसका मुक़ाबला नहीं कर सकेंगे।”

14वह अभी उससे बात कर ही रहे थे कि बादशाह के ख़्वाजासरा पहुँच गए और उसे लेकर जल्दी जल्दी आस्तर के पास पहुँचाया। ज़ियाफ़त तैयार थी।

ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस

WEBREATH · 11:11

«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25

Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.

WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath