عیسائیت
واپس

इस्तिसना 13

1तेरे दरमियान ऐसे लोग उठ खड़े होंगे जो अपने आपको नबी या ख़ाब देखनेवाले कहेंगे। हो सकता है कि वह किसी इलाही निशान या मोजिज़े का एलान करें

2जो वाक़ई वुजूद में आए। साथ साथ वह कहें, “आ, हम दीगर माबूदों की पूजा करें, हम उनकी ख़िदमत करें जिनसे तू अब तक वाक़िफ़ नहीं है।”

3ऐसे लोगों की न सुन। इससे रब तुम्हारा ख़ुदा तुम्हें आज़माकर मालूम कर रहा है कि क्या तुम वाक़ई अपने पूरे दिलो-जान से उससे प्यार करते हो।

4तुम्हें रब अपने ख़ुदा की पैरवी करना और उसी का ख़ौफ़ मानना है। उसके अहकाम के मुताबिक़ ज़िंदगी गुज़ारो, उस की सुनो, उस की ख़िदमत करो, उसके साथ लिपटे रहो।

5ऐसे नबियों या ख़ाब देखनेवालों को सज़ाए-मौत देना, क्योंकि वह तुझे रब तुम्हारे ख़ुदा से बग़ावत करने पर उकसाना चाहते हैं, उसी से जिसने फ़िद्या देकर तुम्हें मिसर की ग़ुलामी से बचाया और वहाँ से निकाल लाया। चूँकि वह तुझे उस राह से हटाना चाहते हैं जिसे रब तेरे ख़ुदा ने तेरे लिए मुक़र्रर किया है इसलिए लाज़िम है कि उन्हें सज़ाए-मौत दी जाए। ऐसी बुराई अपने दरमियान से मिटा देना।

6हो सकता है कि तेरा सगा भाई, तेरा बेटा या बेटी, तेरी बीवी या तेरा क़रीबी दोस्त तुझे चुपके से वरग़लाने की कोशिश करे कि आ, हम जाकर दीगर माबूदों की पूजा करें, ऐसे देवताओं की जिनसे न तू और न तेरे बापदादा वाक़िफ़ थे।

7ख़ाह इर्दगिर्द की या दूर-दराज़ की क़ौमों के देवता हों, ख़ाह दुनिया के एक सिरे के या दूसरे सिरे के माबूद हों,

8किसी सूरत में अपनी रज़ामंदी का इज़हार न कर, न उस की सुन। उस पर रहम न कर। न उसे बचाए रख, न उसे पनाह दे

9बल्कि उसे सज़ाए-मौत दे। और उसे संगसार करते वक़्त पहले तेरा हाथ उस पर पत्थर फेंके, फिर ही बाक़ी तमाम लोग हिस्सा लें।

10उसे ज़रूर पत्थरों से सज़ाए-मौत देना, क्योंकि उसने तुझे रब तेरे ख़ुदा से दूर करने की कोशिश की, उसी से जो तुझे मिसर की ग़ुलामी से निकाल लाया।

11फिर तमाम इसराईल यह सुनकर डर जाएगा और आइंदा तेरे दरमियान ऐसी शरीर हरकत करने की जुर्रत नहीं करेगा।

12जब तू उन शहरों में रहने लगेगा जो रब तेरा ख़ुदा तुझे दे रहा है तो शायद तुझे ख़बर मिल जाए

13कि शरीर लोग तेरे दरमियान से उभर आए हैं जो अपने शहर के बाशिंदों को यह कहकर ग़लत राह पर लाए हैं कि आओ, हम दीगर माबूदों की पूजा करें, ऐसे माबूदों की जिनसे तुम वाक़िफ़ नहीं हो।

14लाज़िम है कि तू दरियाफ़्त करके इसकी तफ़तीश करे और ख़ूब मालूम करे कि क्या हुआ है। अगर साबित हो जाए कि यह घिनौनी बात वाक़ई हुई है

15तो फिर लाज़िम है कि तू शहर के तमाम बाशिंदों को हलाक करे। उसे रब के सुपुर्द करके सरासर तबाह करना, न सिर्फ़ उसके लोग बल्कि उसके मवेशी भी।

16शहर का पूरा माले-ग़नीमत चौक में इकट्ठा कर। फिर पूरे शहर को उसके माल समेत रब के लिए मख़सूस करके जला देना। उसे दुबारा कभी न तामीर किया जाए बल्कि उसके खंडरात हमेशा तक रहें।

17पूरा शहर रब के लिए मख़सूस किया गया है, इसलिए उस की कोई भी चीज़ तेरे पास न पाई जाए। सिर्फ़ इस सूरत में रब का ग़ज़ब ठंडा हो जाएगा, और वह तुझ पर रहम करके अपनी मेहरबानी का इज़हार करेगा और तेरी तादाद बढ़ाएगा, जिस तरह उसने क़सम खाकर तेरे बापदादा से वादा किया है।

18लेकिन यह सब कुछ इस पर मबनी है कि तू रब अपने ख़ुदा की सुने और उसके उन तमाम अहकाम पर अमल करे जो मैं तुझे आज दे रहा हूँ। वही कुछ कर जो उस की नज़र में दुरुस्त है।

ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस

WEBREATH · 11:11

«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25

Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.

WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath