عیسائیت
واپس

2 थिस्सलुनीकियों 2

1भाइयो, यह सवाल उठा है कि हमारे ख़ुदावंद ईसा मसीह की आमद कैसी होगी? हम किस तरह उसके साथ जमा हो जाएंगे? इस नाते से हमारी आपसे दरख़ास्त है

2कि जब लोग कहते हैं कि ख़ुदावंद का दिन आ चुका है तो आप जल्दी से बेचैन या परेशान न हो जाएँ। उनकी बात न मानें, चाहे वह यह दावा भी करें कि उनके पास हमारी तरफ़ से कोई नबुव्वत, पैग़ाम या ख़त है।

3कोई भी आपको किसी भी चाल से फ़रेब न दे, क्योंकि यह दिन उस वक़्त तक नहीं आएगा जब तक आख़िरी बग़ावत पेश न आए और “बेदीनी का आदमी” ज़ाहिर न हो जाए, वह जिसका अंजाम हलाकत होगा।

4वह हर एक की मुख़ालफ़त करेगा जो ख़ुदा और माबूद कहलाता है और अपने आपको उन सबसे बड़ा ठहराएगा। हाँ, वह अल्लाह के घर में बैठकर एलान करेगा, “मैं अल्लाह हूँ।”

5क्या आपको याद नहीं कि मैं आपको यह बताता रहा जब अभी आपके पास था?

6और अब आप जानते हैं कि क्या कुछ उसे रोक रहा है ताकि वह अपने मुक़र्ररा वक़्त पर ज़ाहिर हो जाए।

7क्योंकि यह पुरअसरार बेदीनी अब भी असर कर रही है। लेकिन यह उस वक़्त तक ज़ाहिर नहीं होगी जब तक वह शख़्स हट न जाए जो अब तक उसे रोक रहा है।

8फिर ही “बेदीनी का आदमी” ज़ाहिर होगा। लेकिन जब ख़ुदावंद ईसा आएगा तो वह उसे अपने मुँह की फूँक से मार डालेगा, ज़ाहिर होने पर ही वह उसे हलाक कर देगा।

9“बेदीनी के आदमी” में इबलीस काम करेगा। जब वह आएगा तो हर क़िस्म की ताक़त का इज़हार करेगा। वह झूटे निशान और मोजिज़े पेश करेगा।

10यों वह उन्हें हर तरह के शरीर फ़रेब में फँसाएगा जो हलाक होनेवाले हैं। लोग इसलिए हलाक हो जाएंगे कि उन्होंने सच्चाई से मुहब्बत करने से इनकार किया, वरना वह बच जाते।

11इस वजह से अल्लाह उन्हें बुरी तरह से फ़रेब में फँसने देता है ताकि वह इस झूट पर ईमान लाएँ।

12नतीजे में सब जो सच्चाई पर ईमान न लाए बल्कि नारास्ती से लुत्फ़अंदोज़ हुए मुजरिम ठहरेंगे।

13मेरे भाइयो, वाजिब है कि हम हर वक़्त आपके लिए ख़ुदा का शुक्र करें जिन्हें ख़ुदावंद प्यार करता है। क्योंकि अल्लाह ने आपको शुरू ही से नजात पाने के लिए चुन लिया, ऐसी नजात के लिए जो रूहुल-क़ुद्स से पाकीज़गी पाकर सच्चाई पर ईमान लाने से हासिल होती है।

14अल्लाह ने आपको उस वक़्त यह नजात पाने के लिए बुला लिया जब हमने आपको उस की ख़ुशख़बरी सुनाई। और अब आप हमारे ख़ुदावंद ईसा मसीह के जलाल में शरीक हो सकते हैं।

15भाइयो, इसलिए साबितक़दम रहें और उन रिवायात को थामे रखें जो हमने आपको सिखाई हैं, ख़ाह ज़बानी या ख़त के ज़रीए।

16हमारा ख़ुदावंद ईसा मसीह ख़ुद और ख़ुदा हमारा बाप जिसने हमसे मुहब्बत रखी और अपने फ़ज़ल से हमें अबदी तसल्ली और ठोस उम्मीद बख़्शी

17आपकी हौसलाअफ़्ज़ाई करे और यों मज़बूत करे कि आप हमेशा वह कुछ बोलें और करें जो अच्छा है।

ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस

WEBREATH · 11:11

«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25

Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.

WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath