عیسائیت
واپس

2 समुएल 7

1दाऊद बादशाह सुकून से अपने महल में रहने लगा, क्योंकि रब ने इर्दगिर्द के दुश्मनों को उस पर हमला करने से रोक दिया था।

2एक दिन दाऊद ने नातन नबी से बात की, “देखें, मैं यहाँ देवदार के महल में रहता हूँ जबकि अल्लाह का संदूक़ अब तक तंबू में पड़ा है। यह मुनासिब नहीं है!”

3नातन ने बादशाह की हौसलाअफ़्ज़ाई की, “जो कुछ भी आप करना चाहते हैं वह करें। रब आपके साथ है।”

4लेकिन उसी रात रब नातन से हमकलाम हुआ,

5“मेरे ख़ादिम दाऊद के पास जाकर उसे बता दे कि रब फ़रमाता है, ‘क्या तू मेरी रिहाइश के लिए मकान तामीर करेगा? हरगिज़ नहीं!

6आज तक मैं किसी मकान में नहीं रहा। जब से मैं इसराईलियों को मिसर से निकाल लाया उस वक़्त से मैं ख़ैमे में रहकर जगह बजगह फिरता रहा हूँ।

7जिस दौरान मैं तमाम इसराईलियों के साथ इधर-उधर फिरता रहा क्या मैंने इसराईल के उन राहनुमाओं से कभी इस नाते से शिकायत की जिन्हें मैंने अपनी क़ौम की गल्लाबानी करने का हुक्म दिया था? क्या मैंने उनमें से किसी से कहा कि तुमने मेरे लिए देवदार का घर क्यों नहीं बनाया?’

8चुनाँचे मेरे ख़ादिम दाऊद को बता दे, ‘रब्बुल-अफ़वाज फ़रमाता है कि मैं ही ने तुझे चरागाह में भेड़ों की गल्लाबानी करने से फ़ारिग़ करके अपनी क़ौम इसराईल का बादशाह बना दिया है।

9जहाँ भी तूने क़दम रखा वहाँ मैं तेरे साथ रहा हूँ। तेरे देखते देखते मैंने तेरे तमाम दुश्मनों को हलाक कर दिया है। अब मैं तेरा नाम सरफ़राज़ कर दूँगा, वह दुनिया के सबसे अज़ीम आदमियों के नामों के बराबर ही होगा।

10और मैं अपनी क़ौम इसराईल के लिए एक वतन मुहैया करूँगा, पौदे की तरह उन्हें यों लगा दूँगा कि वह जड़ पकड़कर महफ़ूज़ रहेंगे और कभी बेचैन नहीं होंगे। बेदीन क़ौमें उन्हें उस तरह नहीं दबाएँगी जिस तरह माज़ी में किया करती थीं,

11उस वक़्त से जब मैं क़ौम पर क़ाज़ी मुक़र्रर करता था। मैं तेरे दुश्मनों को तुझसे दूर रखकर तुझे अमनो-अमान अता करूँगा। आज रब फ़रमाता है कि मैं ही तेरे लिए घर बनाऊँगा।

12जब तू बूढ़ा होकर कूच कर जाएगा और अपने बापदादा के साथ आराम करेगा तो मैं तेरी जगह तेरे बेटों में से एक को तख़्त पर बिठा दूँगा। उस की बादशाही को मैं मज़बूत बना दूँगा।

13वही मेरे नाम के लिए घर तामीर करेगा, और मैं उस की बादशाही का तख़्त अबद तक क़ायम रखूँगा।

14मैं उसका बाप हूँगा, और वह मेरा बेटा होगा। जब कभी उससे ग़लती होगी तो मैं उसे यों छड़ी से सज़ा दूँगा जिस तरह इनसानी बाप अपने बेटे की तरबियत करता है।

15लेकिन मेरी नज़रे-करम कभी उससे नहीं हटेगी। उसके साथ मैं वह सुलूक नहीं करूँगा जो मैंने साऊल के साथ किया जब उसे तेरे सामने से हटा दिया।

16तेरा घराना और तेरी बादशाही हमेशा मेरे हुज़ूर क़ायम रहेगी, तेरा तख़्त हमेशा मज़बूत रहेगा’।”

17नातन ने दाऊद के पास जाकर उसे सब कुछ सुनाया जो रब ने उसे रोया में बताया था।

18तब दाऊद अहद के संदूक़ के पास गया और रब के हुज़ूर बैठकर दुआ करने लगा, “ऐ रब क़ादिरे-मुतलक़, मैं कौन हूँ और मेरा ख़ानदान क्या हैसियत रखता है कि तूने मुझे यहाँ तक पहुँचाया है?

19और अब ऐ रब क़ादिरे-मुतलक़, तू मुझे और भी ज़्यादा अता करने को है, क्योंकि तूने अपने ख़ादिम के घराने के मुस्तक़बिल के बारे में भी वादा किया है। क्या तू आम तौर पर इनसान के साथ ऐसा सुलूक करता है? हरगिज़ नहीं!

20लेकिन मैं मज़ीद क्या कहूँ? ऐ रब क़ादिरे-मुतलक़, तू तो अपने ख़ादिम को जानता है।

21तूने अपने फ़रमान की ख़ातिर और अपनी मरज़ी के मुताबिक़ यह अज़ीम काम करके अपने ख़ादिम को इत्तला दी है।

22ऐ रब क़ादिरे-मुतलक़, तू कितना अज़ीम है! तुझ जैसा कोई नहीं है। हमने अपने कानों से सुन लिया है कि तेरे सिवा कोई और ख़ुदा नहीं है।

23दुनिया में कौन-सी क़ौम तेरी उम्मत इसराईल की मानिंद है? तूने इसी एक क़ौम का फ़िद्या देकर उसे ग़ुलामी से छुड़ाया और अपनी क़ौम बना लिया। तूने इसराईल के वास्ते बड़े और हैबतनाक काम करके अपने नाम की शोहरत फैला दी। हमें मिसर से रिहा करके तूने क़ौमों और उनके देवताओं को हमारे आगे से निकाल दिया।

24ऐ रब, तू इसराईल को हमेशा के लिए अपनी क़ौम बनाकर उनका ख़ुदा बन गया है।

25चुनाँचे ऐ रब क़ादिरे-मुतलक़, जो बात तूने अपने ख़ादिम और उसके घराने के बारे में की है उसे अबद तक क़ायम रख और अपना वादा पूरा कर।

26तब तेरा नाम अबद तक मशहूर रहेगा और लोग तसलीम करेंगे कि रब्बुल-अफ़वाज इसराईल का ख़ुदा है। फिर तेरे ख़ादिम दाऊद का घराना भी तेरे हुज़ूर क़ायम रहेगा।

27ऐ रब्बुल-अफ़वाज, इसराईल के ख़ुदा, तूने अपने ख़ादिम के कान को इस बात के लिए खोल दिया है। तू ही ने फ़रमाया, ‘मैं तेरे लिए घर तामीर करूँगा।’ सिर्फ़ इसी लिए तेरे ख़ादिम ने यों तुझसे दुआ करने की जुर्रत की है।

28ऐ रब क़ादिरे-मुतलक़, तू ही ख़ुदा है, और तेरी ही बातों पर एतमाद किया जा सकता है। तूने अपने ख़ादिम से इन अच्छी चीज़ों का वादा किया है।

29अब अपने ख़ादिम के घराने को बरकत देने पर राज़ी हो ताकि वह हमेशा तक तेरे हुज़ूर क़ायम रहे। क्योंकि तू ही ने यह फ़रमाया है, और चूँकि तू ऐ रब क़ादिरे-मुतलक़ ने बरकत दी है इसलिए तेरे ख़ादिम का घराना अबद तक मुबारक रहेगा।”

ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस

WEBREATH · 11:11

«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25

Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.

WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath