عیسائیت
واپس

1 समुएल 8

1जब समुएल बूढ़ा हुआ तो उसने अपने दो बेटों को इसराईल के क़ाज़ी मुक़र्रर किया।

2बड़े का नाम योएल था और छोटे का अबियाह। दोनों बैर-सबा में लोगों की कचहरी लगाते थे।

3लेकिन वह बाप के नमूने पर नहीं चलते बल्कि रिश्वत खाकर ग़लत फ़ैसले करते थे।

4फिर इसराईल के बुज़ुर्ग मिलकर समुएल के पास आए, जो रामा में था।

5उन्होंने कहा, “देखें, आप बूढ़े हो गए हैं और आपके बेटे आपके नमूने पर नहीं चलते। अब हम पर बादशाह मुक़र्रर करें ताकि वह हमारी उस तरह राहनुमाई करे जिस तरह दीगर अक़वाम में दस्तूर है।”

6जब बुज़ुर्गों ने राहनुमाई के लिए बादशाह का तक़ाज़ा किया तो समुएल निहायत नाख़ुश हुआ। चुनाँचे उसने रब से हिदायत माँगी।

7रब ने जवाब दिया, “जो कुछ भी वह तुझसे माँगते हैं उन्हें दे दे। इससे वह तुझे रद्द नहीं कर रहे बल्कि मुझे, क्योंकि वह नहीं चाहते कि मैं उनका बादशाह रहूँ।

8जब से मैं उन्हें मिसर से निकाल लाया वह मुझे छोड़कर दीगर माबूदों की ख़िदमत करते आए हैं। और अब वह तुझसे भी यही सुलूक कर रहे हैं।

9उनकी बात मान ले, लेकिन संजीदगी से उन्हें उन पर हुकूमत करनेवाले बादशाह के हुक़ूक़ से आगाह कर।”

10समुएल ने बादशाह का तक़ाज़ा करनेवालों को सब कुछ कह सुनाया जो रब ने उसे बताया था।

11वह बोला, “जो बादशाह आप पर हुकूमत करेगा उसके यह हुक़ूक़ होंगे : वह आपके बेटों की भरती करके उन्हें अपने रथों और घोड़ों को सँभालने की ज़िम्मादारी देगा। उन्हें उसके रथों के आगे आगे दौड़ना पड़ेगा।

12कुछ उस की फ़ौज के जनरल और कप्तान बनेंगे, कुछ उसके खेतों में हल चलाने और फ़सलें काटने पर मजबूर हो जाएंगे, और बाज़ को उसके हथियार और रथ का सामान बनाना पड़ेगा।

13बादशाह आपकी बेटियों को आपसे छीन लेगा ताकि वह उसके लिए खाना पकाएँ, रोटी बनाएँ और ख़ुशबू तैयार करें।

14वह आपके खेतों और आपके अंगूर और ज़ैतून के बाग़ों का बेहतरीन हिस्सा चुनकर अपने मुलाज़िमों को दे देगा।

15बादशाह आपके अनाज और अंगूर का दसवाँ हिस्सा लेकर अपने अफ़सरों और मुलाज़िमों को दे देगा।

16आपके नौकर-नौकरानियाँ, आपके मोटे-ताज़े बैल और गधे उसी के इस्तेमाल में आएँगे।

17वह आपकी भेड़-बकरियों का दसवाँ हिस्सा तलब करेगा, और आप ख़ुद उसके ग़ुलाम होंगे।

18तब आप पछताकर कहेंगे, ‘हमने बादशाह का तक़ाज़ा क्यों किया?’ लेकिन जब आप रब के हुज़ूर चीख़ते-चिल्लाते मदद चाहेंगे तो वह आपकी नहीं सुनेगा।”

19लेकिन लोगों ने समुएल की बात न मानी बल्कि कहा, “नहीं, तो भी हम बादशाह चाहते हैं,

20क्योंकि फिर ही हम दीगर क़ौमों की मानिंद होंगे। फिर हमारा बादशाह हमारी राहनुमाई करेगा और जंग में हमारे आगे आगे चलकर दुश्मन से लड़ेगा।”

21समुएल ने रब के हुज़ूर यह बातें दोहराईं।

22रब ने जवाब दिया, “उनका तक़ाज़ा पूरा कर, उन पर बादशाह मुक़र्रर कर!” फिर समुएल ने इसराईल के मर्दों से कहा, “हर एक अपने अपने शहर वापस चला जाए।”

ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस

WEBREATH · 11:11

«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25

Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.

WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath