عیسائیت
واپس

1 समुएल 11

1कुछ देर के बाद अम्मोनी बादशाह नाहस ने अपनी फ़ौज लेकर यबीस-जिलियाद का मुहासरा किया। यबीस के तमाम अफ़राद ने उससे गुज़ारिश की, “हमारे साथ मुआहदा करें तो हम आइंदा आपके ताबे रहेंगे।”

2नाहस ने जवाब दिया, “ठीक है, लेकिन इस शर्त पर कि मैं हर एक की दहनी आँख निकालकर तमाम इसराईल की बेइज़्ज़ती करूँगा!”

3यबीस के बुज़ुर्गों ने दरख़ास्त की, “हमें एक हफ़ते की मोहलत दीजिए ताकि हम अपने क़ासिदों को इसराईल की हर जगह भेजें। अगर कोई हमें बचाने के लिए न आए तो हम हथियार डालकर शहर को आपके हवाले कर देंगे।”

4क़ासिद साऊल के शहर जिबिया भी पहुँच गए। जब मक़ामी लोगों ने उनका पैग़ाम सुना तो पूरा शहर फूट फूटकर रोने लगा।

5उस वक़्त साऊल अपने बैलों को खेतों से वापस ला रहा था। उसने पूछा, “क्या हुआ है? लोग क्यों रो रहे हैं?” उसे क़ासिदों का पैग़ाम सुनाया गया।

6तब साऊल पर अल्लाह का रूह नाज़िल हुआ, और उसे सख़्त ग़ुस्सा आया।

7उसने बैलों का जोड़ा लेकर उन्हें टुकड़े टुकड़े कर दिया। फिर क़ासिदों को यह टुकड़े पकड़ाकर उसने उन्हें यह पैग़ाम देकर इसराईल की हर जगह भेज दिया, “जो साऊल और समुएल के पीछे चलकर अम्मोनियों से लड़ने नहीं जाएगा उसके बैल इसी तरह टुकड़े टुकड़े कर दिए जाएंगे!” यह ख़बर सुनकर लोगों पर रब की दहशत तारी हो गई, और सबके सब एक दिल होकर अम्मोनियों से लड़ने के लिए निकले।

8बज़क़ के क़रीब साऊल ने फ़ौज का जायज़ा लिया। यहूदाह के 30,000 अफ़राद थे और बाक़ी क़बीलों के 3,00,000।

9उन्होंने यबीस-जिलियाद के क़ासिदों को वापस भेजकर बताया, “कल दोपहर से पहले पहले आपको बचा लिया जाएगा।” वहाँ के बाशिंदे यह ख़बर सुनकर बहुत ख़ुश हुए।

10उन्होंने अम्मोनियों को इत्तला दी, “कल हम हथियार डालकर शहर के दरवाज़े खोल देंगे। फिर वह कुछ करें जो आपको ठीक लगे।”

11अगले दिन सुबह-सवेरे साऊल ने फ़ौज को तीन हिस्सों में तक़सीम किया। सूरज के तुलू होने से पहले पहले उन्होंने तीन सिम्तों से दुश्मन की लशकरगाह पर हमला किया। दोपहर तक उन्होंने अम्मोनियों को मार मारकर ख़त्म कर दिया। जो थोड़े-बहुत लोग बच गए वह यों तित्तर-बित्तर हो गए कि दो भी इकट्ठे न रहे।

12फ़तह के बाद लोग समुएल के पास आकर कहने लगे, “वह लोग कहाँ हैं जिन्होंने एतराज़ किया कि साऊल हम पर हुकूमत करे? उन्हें ले आएँ ताकि हम उन्हें मार दें।”

13लेकिन साऊल ने उन्हें रोक दिया। उसने कहा, “नहीं, आज तो हम किसी भी भाई को सज़ाए-मौत नहीं देंगे, क्योंकि इस दिन रब ने इसराईल को रिहाई बख़्शी है!”

14फिर समुएल ने एलान किया, “आओ, हम जिलजाल जाकर दुबारा इसकी तसदीक़ करें कि साऊल हमारा बादशाह है।”

15चुनाँचे तमाम लोगों ने जिलजाल जाकर रब के हुज़ूर इसकी तसदीक़ की कि साऊल हमारा बादशाह है। इसके बाद उन्होंने रब के हुज़ूर सलामती की क़ुरबानियाँ पेश करके बड़ा जशन मनाया।

ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस

WEBREATH · 11:11

«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25

Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.

WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath