عیسائیت
واپس

1 सलातीन 1

1दाऊद बादशाह बहुत बूढ़ा हो चुका था। उसे हमेशा सर्दी लगती थी, और उस पर मज़ीद बिस्तर डालने से कोई फ़ायदा न होता था।

2यह देखकर मुलाज़िमों ने बादशाह से कहा, “अगर इजाज़त हो तो हम बादशाह के लिए एक नौजवान कुँवारी ढूँड लें जो आपकी ख़िदमत में हाज़िर रहे और आपकी देख-भाल करे। लड़की आपके साथ लेटकर आपको गरम रखे।”

3चुनाँचे वह पूरे मुल्क में किसी ख़ूबसूरत लड़की की तलाश करने लगे। ढूँडते ढूँडते अबीशाग शूनीमी को चुनकर बादशाह के पास लाया गया।

4अब से वह उस की ख़िदमत में हाज़िर होती और उस की देख-भाल करती रही। लड़की निहायत ख़ूबसूरत थी, लेकिन बादशाह ने कभी उससे सोहबत न की।

5उन दिनों में अदूनियाह बादशाह बनने की साज़िश करने लगा। वह दाऊद की बीवी हज्जीत का बेटा था। यों वह अबीसलूम का सौतेला भाई और उसके मरने पर दाऊद का सबसे बड़ा बेटा था। शक्लो-सूरत के लिहाज़ से लोग उस की बड़ी तारीफ़ किया करते थे, और बचपन से उसके बाप ने उसे कभी नहीं डाँटा था कि तू क्या कर रहा है। अब अदूनियाह अपने आपको लोगों के सामने पेश करके एलान करने लगा, “मैं ही बादशाह बनूँगा।” इस मक़सद के तहत उसने अपने लिए रथ और घोड़े ख़रीदकर 50 आदमियों को रख लिया ताकि वह जहाँ भी जाए उसके आगे आगे चलते रहें।

7उसने योआब बिन ज़रूयाह और अबियातर इमाम से बात की तो वह उसके साथी बनकर उस की हिमायत करने के लिए तैयार हुए।

8लेकिन सदोक़ इमाम, बिनायाह बिन यहोयदा और नातन नबी उसके साथ नहीं थे, न सिमई, रेई या दाऊद के मुहाफ़िज़।

9एक दिन अदूनियाह ने ऐन-राजिल चश्मे के क़रीब की चट्टान ज़ुहलत के पास ज़ियाफ़त की। काफ़ी भेड़-बकरियाँ, गाय-बैल और मोटे-ताज़े बछड़े ज़बह किए गए। अदूनियाह ने बादशाह के तमाम बेटों और यहूदाह के तमाम शाही अफ़सरों को दावत दी थी।

10कुछ लोगों को जान-बूझकर इसमें शामिल नहीं किया गया था। उनमें उसका भाई सुलेमान, नातन नबी, बिनायाह और दाऊद के मुहाफ़िज़ शामिल थे।

11तब नातन सुलेमान की माँ बत-सबा से मिला और बोला, “क्या यह ख़बर आप तक नहीं पहुँची कि हज्जीत के बेटे अदूनियाह ने अपने आपको बादशाह बना लिया है? और हमारे आक़ा दाऊद को इसका इल्म तक नहीं!

12आपकी और आपके बेटे सुलेमान की ज़िंदगी बड़े ख़तरे में है। इसलिए लाज़िम है कि आप मेरे मशवरे पर फ़ौरन अमल करें।

13दाऊद बादशाह के पास जाकर उसे बता देना, ‘ऐ मेरे आक़ा और बादशाह, क्या आपने क़सम खाकर मुझसे वादा नहीं किया था कि तेरा बेटा सुलेमान मेरे बाद तख़्तनशीन होगा? तो फिर अदूनियाह क्यों बादशाह बन गया है?’

14आपकी बादशाह से गुफ़्तगू अभी ख़त्म नहीं होगी कि मैं दाख़िल होकर आपकी बात की तसदीक़ करूँगा।”

15बत-सबा फ़ौरन बादशाह के पास गई जो सोने के कमरे में लेटा हुआ था। उस वक़्त तो वह बहुत उम्ररसीदा हो चुका था, और अबीशाग उस की देख-भाल कर रही थी।

16बत-सबा कमरे में दाख़िल होकर बादशाह के सामने मुँह के बल झुक गई। दाऊद ने पूछा, “क्या बात है?”

17बत-सबा ने कहा, “मेरे आक़ा, आपने तो रब अपने ख़ुदा की क़सम खाकर मुझसे वादा किया था कि तेरा बेटा सुलेमान मेरे बाद तख़्तनशीन होगा।

18लेकिन अब अदूनियाह बादशाह बन बैठा है और मेरे आक़ा और बादशाह को इसका इल्म तक नहीं।

19उसने ज़ियाफ़त के लिए बहुत-से गाय-बैल, मोटे-ताज़े बछड़े और भेड़-बकरियाँ ज़बह करके तमाम शहज़ादों को दावत दी है। अबियातर इमाम और फ़ौज का कमाँडर योआब भी इनमें शामिल हैं, लेकिन आपके ख़ादिम सुलेमान को दावत नहीं मिली।

20ऐ बादशाह मेरे आक़ा, इस वक़्त तमाम इसराईल की आँखें आप पर लगी हैं। सब आपसे यह जानने के लिए तड़पते हैं कि आपके बाद कौन तख़्तनशीन होगा।

21अगर आपने जल्द ही क़दम न उठाया तो आपके कूच कर जाने के फ़ौरन बाद मैं और मेरा बेटा अदूनियाह का निशाना बनकर मुजरिम ठहरेंगे।”

22बत-सबा अभी बादशाह से बात कर ही रही थी कि दाऊद को इत्तला दी गई कि नातन नबी आपसे मिलने आया है। नबी कमरे में दाख़िल होकर बादशाह के सामने औंधे मुँह झुक गया।

24फिर उसने कहा, “मेरे आक़ा, लगता है कि आप इस हक़ में हैं कि अदूनियाह आपके बाद तख़्तनशीन हो।

25क्योंकि आज उसने ऐन-राजिल जाकर बहुत-से गाय-बैल, मोटे-ताज़े बछड़े और भेड़-बकरियों को ज़बह किया है। ज़ियाफ़त के लिए उसने तमाम शहज़ादों, तमाम फ़ौजी अफ़सरों और अबियातर इमाम को दावत दी है। इस वक़्त वह उसके साथ खाना खा खाकर और मै पी पीकर नारा लगा रहे हैं, ‘अदूनियाह बादशाह ज़िंदाबाद!’

26कुछ लोगों को जान-बूझकर दावत नहीं दी। उनमें मैं आपका ख़ादिम, सदोक़ इमाम, बिनायाह बिन यहोयदा और आपका ख़ादिम सुलेमान भी शामिल हैं।

27मेरे आक़ा, क्या आपने वाक़ई इसका हुक्म दिया है? क्या आपने अपने ख़ादिमों को इत्तला दिए बग़ैर फ़ैसला किया है कि यह शख़्स बादशाह बनेगा?”

28जवाब में दाऊद ने कहा, “बत-सबा को बुलाएँ!” वह वापस आई और बादशाह के सामने खड़ी हो गई।

29बादशाह बोला, “रब की हयात की क़सम जिसने फ़िद्या देकर मुझे हर मुसीबत से बचाया है,

30आपका बेटा सुलेमान मेरे बाद बादशाह होगा बल्कि आज ही मेरे तख़्त पर बैठ जाएगा। हाँ, आज ही मैं वह वादा पूरा करूँगा जो मैंने रब इसराईल के ख़ुदा की क़सम खाकर आपसे किया था।”

31यह सुनकर बत-सबा औंधे मुँह झुक गई और कहा, “मेरा मालिक दाऊद बादशाह ज़िंदाबाद!”

32फिर दाऊद ने हुक्म दिया, “सदोक़ इमाम, नातन नबी और बिनायाह बिन यहोयदा को बुला लाएँ।” तीनों आए

33तो बादशाह उनसे मुख़ातिब हुआ, “मेरे बेटे सुलेमान को मेरे ख़च्चर पर बिठाएँ। फिर मेरे अफ़सरों को साथ लेकर उसे जैहून चश्मे तक पहुँचा दें।

34वहाँ सदोक़ और नातन उसे मसह करके इसराईल का बादशाह बना दें। नरसिंगे को बजा बजाकर नारा लगाना, ‘सुलेमान बादशाह ज़िंदाबाद!’

35इसके बाद मेरे बेटे के साथ यहाँ वापस आ जाना। वह महल में दाख़िल होकर मेरे तख़्त पर बैठ जाए और मेरी जगह हुकूमत करे, क्योंकि मैंने उसे इसराईल और यहूदाह का हुक्मरान मुक़र्रर किया है।”

36बिनायाह बिन यहोयदा ने जवाब दिया, “आमीन, ऐसा ही हो! रब मेरे आक़ा का ख़ुदा इस फ़ैसले पर अपनी बरकत दे।

37और जिस तरह रब आपके साथ रहा उसी तरह वह सुलेमान के साथ भी हो, बल्कि वह उसके तख़्त को आपके तख़्त से कहीं ज़्यादा सरबुलंद करे!”

38फिर सदोक़ इमाम, नातन नबी, बिनायाह बिन यहोयदा और बादशाह के मुहाफ़िज़ करेतियों और फ़लेतियों ने सुलेमान को बादशाह के ख़च्चर पर बिठाकर उसे जैहून चश्मे तक पहुँचा दिया।

39सदोक़ के पास तेल से भरा मेंढे का वह सींग था जो मुक़द्दस ख़ैमे में पड़ा रहता था। अब उसने यह तेल लेकर सुलेमान को मसह किया। फिर नरसिंगा बजाया गया और लोग मिलकर नारा लगाने लगे, “सुलेमान बादशाह ज़िंदाबाद! सुलेमान बादशाह ज़िंदाबाद!”

40तमाम लोग बाँसरी बजाते और ख़ुशी मनाते हुए सुलेमान के पीछे चलने लगे। जब वह दुबारा यरूशलम में दाख़िल हुआ तो इतना शोर था कि ज़मीन लरज़ उठी।

41लोगों की यह आवाज़ें अदूनियाह और उसके मेहमानों तक भी पहुँच गईं। थोड़ी देर पहले वह खाने से फ़ारिग़ हुए थे। नरसिंगे की आवाज़ सुनकर योआब चौंक उठा और पूछा, “यह क्या है? शहर से इतना शोर क्यों सुनाई दे रहा है?”

42वह अभी यह बात कर ही रहा था कि अबियातर का बेटा यूनतन पहुँच गया। योआब बोला, “हमारे पास आएँ। आप जैसे लायक़ आदमी अच्छी ख़बर लेकर आ रहे होंगे।”

43यूनतन ने जवाब दिया, “अफ़सोस, ऐसा नहीं है। हमारे आक़ा दाऊद बादशाह ने सुलेमान को बादशाह बना दिया है।

44उसने उसे सदोक़ इमाम, नातन नबी, बिनायाह बिन यहोयदा और बादशाह के मुहाफ़िज़ करेतियों और फ़लेतियों के साथ जैहून चश्मे के पास भेज दिया है। सुलेमान बादशाह के ख़च्चर पर सवार था।

45जैहून चश्मे के पास सदोक़ इमाम और नातन नबी ने उसे मसह करके बादशाह बना दिया। फिर वह ख़ुशी मनाते हुए शहर में वापस चले गए। पूरे शहर में हलचल मच गई। यही वह शोर है जो आपको सुनाई दे रहा है।

46अब सुलेमान तख़्त पर बैठ चुका है,

47और दरबारी हमारे आक़ा दाऊद बादशाह को मुबारकबाद देने के लिए उसके पास पहुँच गए हैं। वह कह रहे हैं, ‘आपका ख़ुदा करे कि सुलेमान का नाम आपके नाम से भी ज़्यादा मशहूर हो जाए। उसका तख़्त आपके तख़्त से कहीं ज़्यादा सरबुलंद हो।’ बादशाह ने अपने बिस्तर पर झुककर अल्लाह की परस्तिश की

48और कहा, ‘रब इसराईल के ख़ुदा की तमजीद हो जिसने मेरे बेटों में से एक को मेरी जगह तख़्त पर बिठा दिया है। उसका शुक्र है कि मैं अपनी आँखों से यह देख सका’।”

49यूनतन के मुँह से यह ख़बर सुनकर अदूनियाह के तमाम मेहमान घबरा गए। सब उठकर चारों तरफ़ मुंतशिर हो गए।

50अदूनियाह सुलेमान से ख़ौफ़ खाकर मुक़द्दस ख़ैमे के पास गया और क़ुरबानगाह के सींगों से लिपट गया।

51किसी ने सुलेमान के पास जाकर उसे इत्तला दी, “अदूनियाह को सुलेमान बादशाह से ख़ौफ़ है, इसलिए वह क़ुरबानगाह के सींगों से लिपटे हुए कह रहा है, ‘सुलेमान बादशाह पहले क़सम खाए कि वह मुझे मौत के घाट नहीं उतारेगा’।”

52सुलेमान ने वादा किया, “अगर वह लायक़ साबित हो तो उसका एक बाल भी बीका नहीं होगा। लेकिन जब भी उसमें बदी पाई जाए वह ज़रूर मरेगा।”

53सुलेमान ने अपने लोगों को अदूनियाह के पास भेज दिया ताकि वह उसे बादशाह के पास पहुँचाएँ। अदूनियाह आया और सुलेमान के सामने औंधे मुँह झुक गया। सुलेमान बोला, “अपने घर चले जाओ!”

ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस

WEBREATH · 11:11

«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25

Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.

WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath