عیسائیت
واپس

1 सलातीन 16

1एक दिन रब ने याहू बिन हनानी को बाशा के पास भेजकर फ़रमाया,

2“पहले तू कुछ नहीं था, लेकिन मैंने तुझे ख़ाक में से उठाकर अपनी क़ौम इसराईल का हुक्मरान बना दिया। तो भी तूने यरुबियाम के नमूने पर चलकर मेरी क़ौम इसराईल को गुनाह करने पर उकसाया और मुझे तैश दिलाया है।

3इसलिए मैं तेरे घराने के साथ वही कुछ करूँगा जो यरुबियाम बिन नबात के घराने के साथ किया था। बाशा की पूरी नसल हलाक हो जाएगी।

4ख़ानदान के जो अफ़राद शहर में मरेंगे उन्हें कुत्ते खा जाएंगे, और जो खुले मैदान में मरेंगे उन्हें परिंदे चट कर जाएंगे।”

5बाक़ी जो कुछ बाशा की हुकूमत के दौरान हुआ, जो कुछ उसने किया और जो कामयाबियाँ उसे हासिल हुईं वह ‘शाहाने-इसराईल की तारीख़’ की किताब में दर्ज हैं।

6जब वह मरकर अपने बापदादा से जा मिला तो उसे तिरज़ा में दफ़न किया गया। फिर उसका बेटा ऐला तख़्तनशीन हुआ।

7रब की सज़ा का जो पैग़ाम हनानी के बेटे याहू नबी ने बाशा और उसके ख़ानदान को सुनाया उस की दो वुजूहात थीं। पहले, बाशा ने यरुबियाम के ख़ानदान की तरह वह कुछ किया जो रब को नापसंद था और उसे तैश दिलाया। दूसरे, उसने यरुबियाम के पूरे ख़ानदान को हलाक कर दिया था।

8ऐला बिन बाशा यहूदाह के बादशाह आसा की हुकूमत के 26वें साल में इसराईल का बादशाह बना। उस की हुकूमत के दो साल के दौरान उसका दारुल-हुकूमत तिरज़ा रहा।

9ऐला का एक अफ़सर बनाम ज़िमरी था। ज़िमरी रथों के आधे हिस्से पर मुक़र्रर था। अब वह बादशाह के ख़िलाफ़ साज़िशें करने लगा। एक दिन ऐला तिरज़ा में महल के इंचार्ज अरज़ा के घर में बैठा मै पी रहा था। जब नशे में धुत हुआ

10तो ज़िमरी ने अंदर जाकर उसे मार डाला। फिर वह ख़ुद तख़्त पर बैठ गया। यह यहूदाह के बादशाह आसा की हुकूमत के 27वें साल में हुआ।

11तख़्त पर बैठते ही ज़िमरी ने बाशा के पूरे ख़ानदान को हलाक कर दिया। उसने किसी भी मर्द को ज़िंदा न छोड़ा, ख़ाह वह दूर का रिश्तेदार था, ख़ाह दोस्त।

12यों वही कुछ हुआ जो रब ने याहू नबी की मारिफ़त बाशा को फ़रमाया था।

13क्योंकि बाशा और उसके बेटे ऐला से संगीन गुनाह सरज़द हुए थे, और साथ साथ उन्होंने इसराईल को भी यह करने पर उकसाया था। अपने बातिल देवताओं से उन्होंने रब इसराईल के ख़ुदा को तैश दिलाया था।

14बाक़ी जो कुछ ऐला की हुकूमत के दौरान हुआ और जो कुछ उसने किया वह ‘शाहाने-इसराईल की तारीख़’ की किताब में दर्ज है।

15ज़िमरी यहूदाह के बादशाह आसा की हुकूमत के 27वें साल में इसराईल का बादशाह बना। लेकिन तिरज़ा में उस की हुकूमत सिर्फ़ सात दिन तक क़ायम रही। उस वक़्त इसराईली फ़ौज फ़िलिस्ती शहर जिब्बतून का मुहासरा कर रही थी।

16जब फ़ौज में ख़बर फैल गई कि ज़िमरी ने बादशाह के ख़िलाफ़ साज़िश करके उसे क़त्ल किया है तो तमाम इसराईलियों ने लशकरगाह में आकर उसी दिन अपने कमाँडर उमरी को बादशाह बना दिया।

17तब उमरी तमाम फ़ौजियों के साथ जिब्बतून को छोड़कर तिरज़ा का मुहासरा करने लगा।

18जब ज़िमरी को पता चला कि शहर दूसरों के क़ब्ज़े में आ गया है तो उसने महल के बुर्ज में जाकर उसे आग लगाई। यों वह जलकर मर गया।

19इस तरह उसे भी मुनासिब सज़ा मिल गई, क्योंकि उसने भी वह कुछ किया था जो रब को नापसंद था। यरुबियाम के नमूने पर चलकर उसने वह तमाम गुनाह किए जो यरुबियाम ने किए और इसराईल को करने पर उकसाया था।

20जो कुछ ज़िमरी की हुकूमत के दौरान हुआ और जो साज़िशें उसने कीं वह ‘शाहाने-इसराईल की तारीख़’ की किताब में दर्ज हैं।

21ज़िमरी की मौत के बाद इसराईली दो फ़िरक़ों में बट गए। एक फ़िरक़ा तिबनी बिन जीनत को बादशाह बनाना चाहता था, दूसरा उमरी को।

22लेकिन उमरी का फ़िरक़ा तिबनी के फ़िरक़े की निसबत ज़्यादा ताक़तवर निकला। चुनाँचे तिबनी मर गया और उमरी पूरी क़ौम पर बादशाह बन गया।

23उमरी यहूदाह के बादशाह आसा की हुकूमत के 31वें साल में इसराईल का बादशाह बना। उस की हुकूमत का दौरानिया 12 साल था। पहले छः साल दारुल-हुकूमत तिरज़ा रहा।

24इसके बाद उसने एक आदमी बनाम समर को चाँदी के 6,000 सिक्के देकर उससे सामरिया पहाड़ी ख़रीद ली और वहाँ अपना नया दारुल-हुकूमत तामीर किया। पहले मालिक समर की याद में उसने शहर का नाम सामरिया रखा।

25लेकिन उमरी ने भी वही कुछ किया जो रब को नापसंद था, बल्कि उसने माज़ी के बादशाहों की निसबत ज़्यादा बदी की।

26उसने यरुबियाम बिन नबात के नमूने पर चलकर वह तमाम गुनाह किए जो यरुबियाम ने किए और इसराईल को करने पर उकसाया था। नतीजे में इसराईली रब अपने ख़ुदा को अपने बातिल देवताओं से तैश दिलाते रहे।

27बाक़ी जो कुछ उमरी की हुकूमत के दौरान हुआ, जो कुछ उसने किया और जो कामयाबियाँ उसे हासिल हुईं वह ‘शाहाने-इसराईल की तारीख़’ की किताब में बयान की गई हैं।

28जब उमरी मरकर अपने बापदादा से जा मिला तो उसे सामरिया में दफ़नाया गया। फिर उसका बेटा अख़ियब तख़्तनशीन हुआ।

29अख़ियब बिन उमरी यहूदाह के बादशाह आसा के 38वें साल में इसराईल का बादशाह बना। उस की हुकूमत का दौरानिया 22 साल था, और उसका दारुल-हुकूमत सामरिया रहा।

30अख़ियब ने भी ऐसे काम किए जो रब को नापसंद थे, बल्कि माज़ी के बादशाहों की निसबत उसके गुनाह ज़्यादा संगीन थे।

31यरुबियाम के नमूने पर चलना उसके लिए काफ़ी नहीं था बल्कि उसने इससे बढ़कर सैदा के बादशाह इतबाल की बेटी ईज़बिल से शादी भी की। नतीजे में वह उसके देवता बाल के सामने झुककर उस की पूजा करने लगा।

32सामरिया में उसने बाल का मंदिर तामीर किया और देवता के लिए क़ुरबानगाह बनाकर उसमें रख दिया।

33अख़ियब ने यसीरत देवी का बुत भी बनवा दिया। यों उसने अपने घिनौने कामों से माज़ी के तमाम इसराईली बादशाहों की निसबत कहीं ज़्यादा रब इसराईल के ख़ुदा को तैश दिलाया।

34अख़ियब की हुकूमत के दौरान बैतेल के रहनेवाले हियेल ने यरीहू शहर को नए सिरे से तामीर किया। जब उस की बुनियाद रखी गई तो उसका सबसे बड़ा बेटा अबीराम मर गया, और जब उसने शहर के दरवाज़े लगा दिए तो उसके सबसे छोटे बेटे सजूब को अपनी जान देनी पड़ी। यों रब की वह बात पूरी हुई जो उसने यशुअ बिन नून की मारिफ़त फ़रमाई थी।

ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस

WEBREATH · 11:11

«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25

Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.

WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath