عیسائیت
واپس

1 तवारीख़ 15

1यरूशलम के उस हिस्से में जिसका नाम ‘दाऊद का शहर’ पड़ गया था दाऊद ने अपने लिए चंद इमारतें बनवाईं। उसने अल्लाह के संदूक़ के लिए भी एक जगह तैयार करके वहाँ ख़ैमा लगा दिया।

2फिर उसने हुक्म दिया, “सिवाए लावियों के किसी को भी अल्लाह का संदूक़ उठाने की इजाज़त नहीं। क्योंकि रब ने इन्हीं को रब का संदूक़ उठाने और हमेशा के लिए उस की ख़िदमत करने के लिए चुन लिया है।”

3इसके बाद दाऊद ने तमाम इसराईल को यरूशलम बुलाया ताकि वह मिलकर रब का संदूक़ उस जगह ले जाएँ जो उसने उसके लिए तैयार कर रखी थी।

4बादशाह ने हारून और बाक़ी लावियों की औलाद को भी बुलाया।

5दर्जे-ज़ैल उन लावी सरपरस्तों की फ़हरिस्त है जो अपने रिश्तेदारों को लेकर आए। क़िहात के ख़ानदान से ऊरियेल 120 मर्दों समेत,

6मिरारी के ख़ानदान से असायाह 220 मर्दों समेत,

7जैरसोम के ख़ानदान से योएल 130 मर्दों समेत,

8इलीसफ़न के ख़ानदान से समायाह 200 मर्दों समेत,

9हबरून के ख़ानदान से इलियेल 80 मर्दों समेत,

10उज़्ज़ियेल के ख़ानदान से अम्मीनदाब 112 मर्दों समेत।

11दाऊद ने दोनों इमामों सदोक़ और अबियातर को मज़कूरा छः लावी सरपरस्तों समेत अपने पास बुलाकर

12उनसे कहा, “आप लावियों के सरबराह हैं। लाज़िम है कि आप अपने क़बायली भाइयों के साथ अपने आपको मख़सूसो-मुक़द्दस करके रब इसराईल के ख़ुदा के संदूक़ को उस जगह ले जाएँ जो मैंने उसके लिए तैयार कर रखी है।

13पहली मरतबा जब हमने उसे यहाँ लाने की कोशिश की तो यह आप लावियों के ज़रीए न हुआ, इसलिए रब हमारे ख़ुदा का क़हर हम पर टूट पड़ा। उस वक़्त हमने उससे दरियाफ़्त नहीं किया था कि उसे उठाकर ले जाने का क्या मुनासिब तरीक़ा है।”

14तब इमामों और लावियों ने अपने आपको मख़सूसो-मुक़द्दस करके रब इसराईल के ख़ुदा के संदूक़ को यरूशलम लाने के लिए तैयार किया।

15फिर लावी अल्लाह के संदूक़ को उठाने की लकड़ियों से अपने कंधों पर यों ही रखकर चल पड़े जिस तरह मूसा ने रब के कलाम के मुताबिक़ फ़रमाया था।

16दाऊद ने लावी सरबराहों को यह हुक्म भी दिया, “अपने क़बीले में से ऐसे आदमियों को चुन लें जो साज़, सितार, सरोद और झाँझ बजाते हुए ख़ुशी के गीत गाएँ।”

17इस ज़िम्मादारी के लिए लावियों ने ज़ैल के आदमियों को मुक़र्रर किया : हैमान बिन योएल, उसका भाई आसफ़ बिन बरकियाह और मिरारी के ख़ानदान का ऐतान बिन कौसायाह।

18दूसरे मक़ाम पर उनके यह भाई आए : ज़करियाह, याज़ियेल, समीरामोत, यहियेल, उन्नी, इलियाब, बिनायाह, मासियाह, मत्तितियाह, इलीफ़लेहू, मिक़नियाह, ओबेद-अदोम और यइयेल। यह दरबान थे।

19हैमान, आसफ़ और ऐतान गुलूकार थे, और उन्हें पीतल के झाँझ बजाने की ज़िम्मादारी दी गई।

20ज़करियाह, अज़ियेल, समीरामोत, यहियेल, उन्नी, इलियाब, मासियाह और बिनायाह को अलामूत के तर्ज़ पर सितार बजाना था।

21मत्तितियाह, इलीफ़लेहू, मिक़नियाह, ओबेद-अदोम, यइयेल और अज़ज़ियाह को शमीनीत के तर्ज़ पर सरोद बजाने के लिए चुना गया।

22कननियाह ने लावियों की कवाइर की राहनुमाई की, क्योंकि वह इसमें माहिर था।

23बरकियाह, इलक़ाना, ओबेद-अदोम और यहियाह अहद के संदूक़ के दरबान थे। सबनियाह, यूसफ़त, नतनियेल, अमासी, ज़करियाह, बिनायाह और इलियज़र को तुरम बजाकर अल्लाह के संदूक़ के आगे आगे चलने की ज़िम्मादारी दी गई। सातों इमाम थे।

25फिर दाऊद, इसराईल के बुज़ुर्ग और हज़ार हज़ार फ़ौजियों पर मुक़र्रर अफ़सर ख़ुशी मनाते हुए निकलकर ओबेद-अदोम के घर गए ताकि रब के अहद का संदूक़ वहाँ से लेकर यरूशलम पहुँचाएँ।

26जब ज़ाहिर हुआ कि अल्लाह अहद के संदूक़ को उठानेवाले लावियों की मदद कर रहा है तो सात जवान साँडों और सात मेंढों को क़ुरबान किया गया।

27दाऊद बारीक कतान का लिबास पहने हुए था, और इस तरह अहद का संदूक़ उठानेवाले लावी, गुलूकार और कवाइर का लीडर कननियाह भी। इसके अलावा दाऊद कतान का बालापोश पहने हुए था।

28तमाम इसराईली ख़ुशी के नारे लगा लगाकर, नरसिंगे और तुरम फूँक फूँककर और झाँझ, सितार और सरोद बजा बजाकर रब के अहद का संदूक़ यरूशलम लाए।

29रब का अहद का संदूक़ दाऊद के शहर में दाख़िल हुआ तो दाऊद की बीवी मीकल बिंत साऊल खिड़की में से जुलूस को देख रही थी। जब बादशाह कूदता और नाचता हुआ नज़र आया तो मीकल ने उसे हक़ीर जाना।

ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस

WEBREATH · 11:11

«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25

Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.

WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath