عیسائیت
واپس

1 तवारीख़ 13

1दाऊद ने तमाम अफ़सरों से मशवरा किया। उनमें हज़ार हज़ार और सौ सौ फ़ौजियों पर मुक़र्रर अफ़सर शामिल थे।

2फिर उसने इसराईल की पूरी जमात से कहा, “अगर आपको मंज़ूर हो और रब हमारे ख़ुदा की मरज़ी हो तो आएँ हम पूरे मुल्क के इसराईली भाइयों को दावत दें कि आकर हमारे साथ जमा हो जाएँ। वह इमाम और लावी भी शरीक हों जो अपने अपने शहरों और चरागाहों में बसते हैं।

3फिर हम अपने ख़ुदा के अहद का संदूक़ दुबारा अपने पास वापस लाएँ, क्योंकि साऊल के दौरे-हुकूमत में हम उस की फ़िकर नहीं करते थे।”

4पूरी जमात मुत्तफ़िक़ हुई, क्योंकि यह मनसूबा सबको दुरुस्त लगा।

5चुनाँचे दाऊद ने पूरे इसराईल को जुनूब में मिसर के सैहूर से लेकर शिमाल में लबो-हमात तक बुलाया ताकि सब मिलकर अल्लाह के अहद का संदूक़ क़िरियत-यारीम से यरूशलम ले जाएँ।

6फिर वह उनके साथ यहूदाह के बाला यानी क़िरियत-यारीम गया ताकि रब ख़ुदा का संदूक़ उठाकर यरूशलम ले जाएँ, वही संदूक़ जिस पर रब के नाम का ठप्पा लगा है और जहाँ वह संदूक़ के ऊपर करूबी फ़रिश्तों के दरमियान तख़्तनशीन है।

7क़िरियत-यारीम पहुँचकर लोगों ने अल्लाह के संदूक़ को अबीनदाब के घर से निकालकर एक नई बैलगाड़ी पर रख दिया, और उज़्ज़ा और अख़ियो उसे यरूशलम की तरफ़ ले जाने लगे।

8दाऊद और तमाम इसराईली गाड़ी के पीछे चल पड़े। सब अल्लाह के हुज़ूर पूरे ज़ोर से ख़ुशी मनाने लगे। जूनीपर की लकड़ी के मुख़्तलिफ़ साज़ भी बजाए जा रहे थे। फ़िज़ा सितारों, सरोदों, दफ़ों, झाँझों और तुरमों की आवाज़ों से गूँज उठी।

9वह गंदुम गाहने की एक जगह पर पहुँच गए जिसके मालिक का नाम कैदून था। वहाँ बैल अचानक बेकाबू हो गए। उज़्ज़ा ने जल्दी से अहद का संदूक़ पकड़ लिया ताकि वह गिर न जाए।

10उसी लमहे रब का ग़ज़ब उस पर नाज़िल हुआ, क्योंकि उसने अहद के संदूक़ को छूने की जुर्रत की थी। वहीं अल्लाह के हुज़ूर उज़्ज़ा गिरकर हलाक हुआ।

11दाऊद को बड़ा रंज हुआ कि रब का ग़ज़ब उज़्ज़ा पर यों टूट पड़ा है। उस वक़्त से उस जगह का नाम परज़-उज़्ज़ा यानी ‘उज़्ज़ा पर टूट पड़ना’ है।

12उस दिन दाऊद को अल्लाह से ख़ौफ़ आया। उसने सोचा, “मैं किस तरह अल्लाह का संदूक़ अपने पास पहुँचा सकूँगा?”

13चुनाँचे उसने फ़ैसला किया कि हम अहद का संदूक़ यरूशलम नहीं ले जाएंगे बल्कि उसे ओबेद-अदोम जाती के घर में महफ़ूज़ रखेंगे।

14वहाँ वह तीन माह तक पड़ा रहा। इन तीन महीनों के दौरान रब ने ओबेद-अदोम के घराने और उस की पूरी मिलकियत को बरकत दी।

ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस

WEBREATH · 11:11

«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25

Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.

WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath