عیسائیت
واپس

1 तवारीख़ 10

1जिलबुअ के पहाड़ी सिलसिले पर फ़िलिस्तियों और इसराईलियों के दरमियान जंग छिड़ गई। लड़ते लड़ते इसराईली फ़रार होने लगे, लेकिन बहुत लोग वहीं शहीद हो गए।

2फिर फ़िलिस्ती साऊल और उसके बेटों यूनतन, अबीनदाब और मलकीशुअ के पास जा पहुँचे। तीनों बेटे हलाक हो गए,

3जबकि लड़ाई साऊल के इर्दगिर्द उरूज तक पहुँच गई। फिर वह तीरअंदाज़ों का निशाना बनकर ज़ख़मी हो गया।

4उसने अपने सिलाहबरदार को हुक्म दिया, “अपनी तलवार मियान से खींचकर मुझे मार डाल! वरना यह नामख़तून मुझे बेइज़्ज़त करेंगे।” लेकिन सिलाहबरदार ने इनकार किया, क्योंकि वह बहुत डरा हुआ था। आख़िर में साऊल अपनी तलवार लेकर ख़ुद उस पर गिर गया।

5जब सिलाहबरदार ने देखा कि मेरा मालिक मर गया है तो वह भी अपनी तलवार पर गिरकर मर गया।

6यों उस दिन साऊल, उसके तीन बेटे और उसका तमाम घराना हलाक हो गए।

7जब मैदाने-यज़्रएल के इसराईलियों को ख़बर मिली कि इसराईली फ़ौज भाग गई और साऊल अपने बेटों समेत मारा गया है तो वह अपने शहरों को छोड़कर भाग निकले, और फ़िलिस्ती छोड़े हुए शहरों पर क़ब्ज़ा करके उनमें बसने लगे।

8अगले दिन फ़िलिस्ती लाशों को लूटने के लिए दुबारा मैदाने-जंग में आ गए। जब उन्हें जिलबुअ के पहाड़ी सिलसिले पर साऊल और उसके तीनों बेटे मुरदा मिले

9तो उन्होंने साऊल का सर काटकर उसका ज़िरा-बकतर उतार लिया और क़ासिदों को अपने पूरे मुल्क में भेजकर अपने बुतों और अपनी क़ौम को फ़तह की इत्तला दी।

10साऊल का ज़िरा-बकतर उन्होंने अपने देवताओं के मंदिर में महफ़ूज़ कर लिया और उसके सर को दजून देवता के मंदिर में लटका दिया।

11जब यबीस-जिलियाद के बाशिंदों को ख़बर मिली कि फ़िलिस्तियों ने साऊल की लाश के साथ क्या कुछ किया है

12तो शहर के तमाम लड़ने के क़ाबिल आदमी बैत-शान के लिए रवाना हुए। वहाँ पहुँचकर वह साऊल और उसके बेटों की लाशों को उतारकर यबीस ले गए जहाँ उन्होंने उनकी हड्डियों को यबीस के बड़े दरख़्त के साये में दफ़नाया। उन्होंने रोज़ा रखकर पूरे हफ़ते तक उनका मातम किया।

13साऊल को इसलिए मारा गया कि वह रब का वफ़ादार न रहा। उसने उस की हिदायात पर अमल न किया, यहाँ तक कि उसने मुरदों की रूह से राबिता करनेवाली जादूगरनी से मशवरा किया,

14हालाँकि उसे रब से दरियाफ़्त करना चाहिए था। यही वजह है कि रब ने उसे सज़ाए-मौत देकर सलतनत को दाऊद बिन यस्सी के हवाले कर दिया।

ذریعہ: किताबे-मुक़द्दस

WEBREATH · 11:11

«He himself gives everyone life and breath and everything else» — Acts 17:25

Breath is one for all: everyone lives by it, whoever they are and whatever they believe. Every day at 11:11 local time people stop for sixty seconds, breathe, and thank GOD for the breath — each in their own words, each within themselves. In that minute we are One Breath.

WEBREATH — the Minute at 11:11, your own local time — we are One Breath